डॉ अतुल मोहन सिंह, लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के तहत BJP ने राज्य की सभी 403 सीटों पर विधायकों और संभावित दावेदारों का नए सिरे से गुप्त सर्वे शुरू करा दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बार किसी भी मौजूदा विधायक का टिकट पक्का नहीं माना जा रहा है। केवल सर्वे की रिपोर्ट और जनता के बीच छवि ही टिकट तय करने का मुख्य आधार बनेगी।
निजी एजेंसियां कर रही सर्वे
पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा संगठन ने इस बार चुनावी फीडबैक जुटाने के लिए निजी एजेंसियों को मैदान में उतारा है। राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में सर्वे कराया जा रहा है ताकि जमीनी हकीकत का आकलन हो सके। सूत्रों की माने तो प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से पार्टी कम से कम तीन मजबूत और पसंदीदा प्रत्याशियों का पैनल तैयार कर रही है। सर्वे में जिस दावेदार की रेटिंग सबसे ऊपर रहेगी, टिकट पर पहला दावा उसी का माना जाएगा।
इस पैमानों पर होगा मूल्यांकन?
संगठन ने इस बार परफॉर्मेंस जांचने के लिए कुछ मापदंड तय किए हैं। जिनमें विधायक अपने क्षेत्र की जनता और स्थानीय कार्यकर्ताओं के लिए कितना लोकप्रिय है और उसकी छवि एक ईमानदार जनसेवक की है या नहीं। इसके अलावा विधायक का सोशल मीडिया एक्टिविटी और उसके जरिए जनता/युवाओं के बीच बनाई गई पकड़ भी मूल्यांकन का एक हिस्सा है। इतना ही नही स्थानीय स्तर पर विधायक के खिलाफ नाराजगी और क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों का असर भी देखा जा रहा है।
नए चेहरों को मिल सकता है मौका?
लोकसभा चुनाव के बाद से ही भाजपा चुनावी रणनीति को लेकर पूरी तरह सतर्क है। इस गुप्त सर्वे की रिपोर्ट सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भेजी जाएगी। अगर किसी वर्तमान विधायक के खिलाफ नकारात्मक रिपोर्ट आती है, तो उसकी जगह सर्वे में शीर्ष पर रहने वाले नए चेहरे को चुनावी मैदान उतारने पर विचार किया जा सकता है।