शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल में छात्रावास की व्यवस्थाओं से परेशान छात्राओं ने बुधवार को प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचने के लिए बड़ा कदम उठाया। संभागीय मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर कंचनपुर स्थित आवासीय कन्या छात्रावास धुरवार की छात्राएँ पैदल ही कलेक्टर कार्यालय पहुंच गईं।
छात्राओं से मिलने की जिद पर अड़ी रहीं छात्राएँ
छात्राएँ करीब आठ किलोमीटर का रास्ता तय कर कलेक्टर पार्थ जायसवाल के कार्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने भोजन की व्यवस्था समेत छात्रावास में मिल रही सुविधाओं और अन्य समस्याओं के बारे में कलेक्टर को जानकारी दी। छात्राओं का कहना था कि वे अपनी समस्याओं को लेकर सीधे कलेक्टर से बात करना चाहती हैं। इसी वजह से उन्होंने रास्ते में प्रशासन की ओर से की गई वाहन से ले जाने की पेशकश को भी स्वीकार नहीं किया।
पहले भी सामने आ चुकी हैं शिकायतें
बताया गयाय कि इस परिसर की छात्राएँ पहले भी अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर कलेक्टर से मिल चुकी हैं। इसके बावजूद व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं होने से छात्राओं में नाराजगी बनी हुई थी। इस बार छात्राओं के इस तरह छात्रावास से निकलकर कलेक्ट्रेट पहुंचने से उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हुए। प्रशासनिक अमला छात्राओं के पीछे-पीछे कलेक्ट्रेट तक पहुंचा।
कलेक्टर ने कमरे में बैठकर सुनीं समस्याएँ
कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने छात्राओं को अपने कक्ष में बुलाया और उनकी समस्याएँ विस्तार से सुनीं। बातचीत के बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच दल गठित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अधिकारियों को छात्रावास की व्यवस्थाओं की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद छात्राओं को समझाइश दी गई और वाहन से वापस विद्यालय भेजा गया।
तीन दिन में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश
कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने अधिकारियों को छात्रावासों में बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की नियमित निगरानी करने को कहा है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी स्थिति दोबारा सामने न आए। कलेक्टर के अनुसार, एसडीएम के माध्यम से मामले की जांच कराई जा रही है। जांच दल को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
छात्राओं के इस कदम ने छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि छात्राओं की शिकायतों में कितनी सच्चाई है और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।