सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली में टीएचडीसी के कोयला खनन के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर उतर आया। इस बार मोर्चा महिलाओं ने संभाला और कंपनी की सैकड़ों को आगे नहीं बढ़ने दिया। उनका कहना है कि खदान के काम ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल कर दी है और सुनवाई कहीं नहीं हो रही है।
घरों में दरारें आ रही लेकिन सांस लेना भी भारी
गांव वालों के अनुसार खदान में होने वाली भारी ब्लास्टिंग से उनके मकान हिल जाते हैं। कई घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। वे यह भी कहते हैं कि इलाके में प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि सांस लेने में तकलीफ होती है। आदिवासी परिवारों का आरोप है कि इन हालात में वे हर दिन डर और असुरक्षा के बीच जी रहे हैं।
गाड़ियों के सामने खड़ी हुई महिलाएं
सोमवार को महिलाएं एकजुट होकर सड़क पर उतर आईं और टीएचडीसी की गाड़ियों का रास्ता रोक दिया। कतार में खड़ी सैकड़ों गाड़ियां जहां की तहां रुक गईं। महिलाओं का कहना है कि वे लंबे समय से ब्लास्टिंग, प्रदूषण और धमकियों की परेशानी झेल रही हैं। उनके मुताबिक कंपनी के काम का असर सीधे उनके जीवन पर पड़ रहा है, पर इसका कोई पक्का समाधान अब तक नहीं निकला।
विरोध करने पर केस की धमकी का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि जब पुरुष अपनी बात रखने आगे आते हैं, तो उन्हें मुकदमे दर्ज कराने की धमकी दे दी जाती है। उन्होंने कंपनी से जुड़े कुछ लोगों पर डराने-धमकाने की बात भी कही है। लोगों का कहना है कि आवाज दबाने के बजाय उनकी शिकायतें गंभीरता से सुनी जाएं।
महिलाओं का सवाल जिम्मेदारी कौन लेगा?
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने सीधा सवाल रखा कि जब घरों में दरारें पड़ रही हैं। प्रदूषण से सेहत बिगड़ रही है और बार-बार जगह छोड़ने को कहा जा रहा है तो उनकी सुरक्षा और अधिकारों की जिम्मेदारी किसकी है। उनकी मांग है कि ब्लास्टिंग से हुए नुकसान, प्रदूषण के असर और धमकियों के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो। साथ ही प्रभावित परिवारों की दिक्कतें दूर की जाएं और उन्हें सुरक्षित माहौल में रहने का हक मिले।
अब प्रशासन के रुख पर नजर
इस मामले में जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों की भूमिका अहम होगी। ग्रामीणों की शिकायतों की जांच कर असली हालात सामने लाना जरूरी है। टीएचडीसी की पक्ष आना भी बाकी है, ताकि सभी तथ्यों को देखकर कार्रवाई हो सके। फिलहाल इलाके में तनाव बना हुआ है और लोग देख रहे है कि प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।