बृजेश मिश्रा, अमेठी: रक्षाबंधन और अन्य त्योहारों से पहले चीनी के दामों में लगातार तेजी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अमेठी, बाजार शुक्ल, गौरीगंज, मुंशीगंज और रामगंज के बाजारों में चीनी के फुटकर भाव में तेजी देखी जा रही है। बढ़ती कीमतों का सीधा असर मिठाई, खीर, सेवईं और अन्य पकवानों की लागत पर पड़ने की आशंका है।
पांच साल में अधिकतम भाव ₹45 से बढ़कर ₹70 किलो तक पहुंचा
पिछले पांच साल के अगस्त माह के दामों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 में चीनी ₹38 से ₹45, 2022 में ₹42 से ₹50, 2023 में ₹46 से ₹56, 2024 में ₹52 से ₹62 और 2025 में ₹55 से ₹70 प्रति किलो तक बिकी। यानी पांच साल में अधिकतम भाव में ₹25 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
उत्पादन घटने से बढ़ा दबाव
जानकारी के मुताबिक मौजूदा चीनी सीजन में उत्पादन का अनुमान करीब 306 लाख मीट्रिक टन रह गया है, जबकि शुरुआती अनुमान करीब 343.5 लाख टन था। उत्पादन अनुमान से करीब 37.5 लाख टन कम रहने की आशंका है। गन्ने में रोग, अधिक बारिश और जलभराव से उत्पादन प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
मांग बढ़ी तो त्योहार पर और बढ़ सकता है खर्च
रक्षाबंधन पर घरों में मिठाई, खीर और अन्य पकवान बनाने के साथ मिठाई की दुकानों पर भी मांग बढ़ती है। ऐसे में चीनी की कीमत बढ़ने से लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है।
थोक बाजार पर निर्भर है भाव
सुशील जायसवाल, मिठाई विक्रेता, ने बताया कि चीनी के दाम बढ़ने से मिठाई बनाने की लागत बढ़ गई है। त्योहार पर मांग बढ़ने वाली है। यदि चीनी के भाव जल्द नहीं घटे तो मिठाई के दाम बढ़ाना पड़ सकता है। महेश सोनी, किराना व्यापारी, ने बताया कि थोक बाजार में लगातार भाव बढ़ रहे हैं। त्योहार नजदीक आने से मांग भी बढ़ी है। आगे दाम किस दिशा में जाएंगे, यह बाजार में चीनी की आपूर्ति पर निर्भर करेगा।
रसोई का बजट प्रभावित
सुशील मिश्रा का कहना है कि चीनी महंगी होने से रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है। त्योहार पर मिठाई और पकवान बनाने में पहले से ज्यादा खर्च आएगा। सरकार को बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए जल्द प्रभावी कदम उठाने चाहिए। पिछले पांच साल में चीनी की कीमत में लगातार बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ता की चिंता बढ़ा दी है। त्योहार से पहले दामों में और तेजी आई तो मिठाई का स्वाद जेब पर भारी पड़ सकता है।