प्रमोद शर्मा, हापुड़: गंगा नदी पर बने पांटून पुल यानी पीपा पुल को लेकर प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। गंगा के बढ़ते जलस्तर और पुल से रोजाना होने वाले आवागमन को देखते हुए सोमवार को हापुड़ और अमरोहा प्रशासन आमने-सामने बैठा। दोनों जिलों के जिलाधिकारियों ने संयुक्त समीक्षा बैठक करने के साथ ही मौके पर पहुंचकर पीपा पुल और आसपास की व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने साफ कर दिया कि श्रद्धालुओं और आमजन की सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी हापुड़ श्रीमती कविता मीना और जिलाधिकारी अमरोहा ने पांटून पुल की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। इसके साथ ही पुल को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग, बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था और आवागमन की स्थिति को परखा गया। पुल पर प्रतिदिन गुजरने वाले लोगों के साथ दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की गई।
जलस्तर बढ़ा तो बंद होगा पुल
गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। समीक्षा बैठक में पुल को परिस्थितियों के अनुसार खोलने और बंद करने की प्रक्रिया पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने वैकल्पिक मार्गों की स्थिति भी देखी, ताकि पुल पर आवागमन रोकने की जरूरत पड़ने पर लोगों को परेशानी न हो। आपात स्थिति से निपटने के लिए गोताखोरों की तैनाती और बचाव कार्यों की तैयारियों पर भी मंथन किया गया।
हर विभाग को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश
दोनों जनपदों के अधिकारियों को पुल के रख-रखाव, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को लगातार दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में दोनों जिलों की टीमें आपसी समन्वय से तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करेंगी। पुल पर बैरिकेडिंग और प्रकाश व्यवस्था को भी प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया गया।
जिलाधिकारी ने कहा कि पांटून पुल दोनों जनपदों के बीच कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण साधन है। श्रद्धालुओं और आमजन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। गंगा के जलस्तर और परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जाए तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल निर्णय लिया जाए। सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की इस कवायद से साफ है कि गंगा का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में पीपा पुल पर किसी भी जोखिम को लेकर अफसर पहले से तैयार रहना चाहते हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ और वाहनों के दबाव के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है।