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'जनता कुटीर' से 'गोकर्ण भवन': खोजे जा रहे डॉ. अशोक बाजपेयी के नए ठिकाने के मायने

2027 के विधानसभा चुनाव नज़दीक खिसकने के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। आठ विधानसभा सीटों पर संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं के बीच पूर्व मंत्री...

By : विकास जैन
'जनता कुटीर' से 'गोकर्ण भवन': खोजे जा रहे डॉ. अशोक बाजपेयी के नए ठिकाने के मायने

'जनता कुटीर' से 'गोकर्ण भवन': खोजे जा रहे डॉ. अशोक बाजपेयी के नए ठिकाने के मायने

बृजेश कबीर, हरदोई: 2027 के विधानसभा चुनाव नज़दीक खिसकने के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। आठ विधानसभा सीटों पर संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं के बीच पूर्व मंत्री एवं पूर्व सांसद डॉ. अशोक बाजपेयी का मुख्यालय प्रवास सियासी हलकों में चर्चा में है। खास यह है, इस बार उनकी गतिविधियों का केन्द्र बरसों पुराना जनता कुटीर नहीं, बल्कि सिविल लाइंस का गोकर्ण भवन बना है।

विधायी राजनीति में प्रवेश के बाद से डॉ. बाजपेयी की हरदोई में राजनीतिक गतिविधियां धर्मशाला रोड स्थित जनता कुटीर से संचालित होती रही हैं। अब सहोदर अनुज अजय बाजपेयी ’भुल्लन’ के आवास गोकर्ण भवन पर प्रवास को भी राजनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है। सुबह कम्पनी बाग पहुंचकर लोगों से मुलाकात और हरिवंश सिंह की योग कक्षा में सहभागिता ने उनके प्रवास को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया।

इसी बीच बुधवार से कम्पनी बाग पांच नवंबर तक बंद किए जाने की सरकारी सूचना आई। वंदन योजना से सौंदर्यीकरण कार्य प्रगति पर होने का कारण बताया गया है। हालांकि, बाग में सुबह लोगों से मेल-मुलाकात कर रहे डॉ. बाजपेयी के प्रवास के दौरान ही बन्दी का समय पड़ने से कुछ लोग इसे उनकी सक्रियता से जोड़कर भी सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल कम्पनी बाग बन्द किए जाने और डॉ. बाजपेयी के कार्यक्रम के बीच संबंध की पुष्टि नहीं है।

डॉ. बाजपेयी के हरदोई प्रवास में पुराने साथियों, कार्यकर्ताओं, शुभचिंतकों और स्थानीय लोगों से मुलाकातों को स्वाभाविक ही राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है। खासकर इसलिए भी कि भुल्लन की शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक भूमिका की जब बातें हैं। हालांकि, उनके चुनाव लड़ने या डॉ. बाजपेयी के प्रवास के पीछे चुनावी रणनीति की पुष्टि नहीं है। फिलहाल इतना है, चुनाव से पहले बदला ठिकाना, सुबह की मुलाकातें और कम्पनी बाग की बंदी, तीनों ने हरदोई की सियासी फिजाओं में एक शिगूफा तो छोड़ा ही है।

डॉ. अशोक बाजपेयी का सियासी सफरनामा

हरियावां विकास खंड के बूढ़ागांव के डॉ. अशोक बाजपेयी ने छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीतिक यात्रा शुरू की। लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा। आपातकाल में 19 महीने जेल में रहे। जनता पार्टी के टिकट पर 1977 में पहली बार पिहानी विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए और 1978 में बाबू बनारसी दास सरकार में उच्च शिक्षा एवं पर्वतीय विकास विभाग के राज्यमंत्री बने। वर्ष 1985 में दोबारा विधायक निर्वाचित होने के बाद विधानसभा में मुख्य सचेतक बने। 

मुलायम सरकार में रहे शिक्षा मंत्री

मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में 1989 में शिक्षा मंत्री बने। समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे। पिहानी से 1993, 1996 और 2002 में विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 1998 से 2002 के बीच विधानसभा की लोक लेखा समिति के सभापति का चार बार दायित्व संभाला। मुलायम सरकार में 2003 में खाद्य एवं रसद विभाग तथा 2004 से 2007 तक कृषि एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के कैबिनेट मंत्री रहे। सपा ने 2016 में विधान परिषद सदस्य बनाया। अगस्त 2017 में परिषद से इस्तीफा देकर योगी आदित्यनाथ के लिए सीट खाली की और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। भाजपा के टिकट मार्च 2018 में राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए और अप्रैल 2024 में कार्यकाल पूरा हुआ।

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