उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में खड़े हनुमान की प्रतिमा को हटाने की कोशिशों के बीच अब प्रशासन का तरीका बदलता नजर आ रहा है। चार दिन तक तकनीकी और प्रशासनिक प्रयासों के बाद भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं मिली। अब मध्य प्रदेश पुलिस के जवान और अधिकारी बैंड-बाजे के साथ मंदिर पहुंचे और हनुमान जी को मनाने की कोशिश की।
वहीं, दूसरी ओर मंदरि को लेकर श्रद्धालुओं का विरोध भी तेज हो गया है। भक्तों का साफ कहना है कि किसी भी स्थिति में प्रतिमा को यहां से हटाने नहीं दिया जाएगा। मंगलवारी की शाम मंदिर परिसर में महाआरती हुई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
एक्सपर्ट की रिपोर्ट के बाद तय होगा अगला कदम
प्रतिमा की वास्तविक गहराई जानने के लिए मंगलवार को एक बार फिर से विशेषज्ञों से जांच कराई गई। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, इसकी रिपोर्ट एक-दो दिन में आने की उम्मीद है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रतिमा को लेकर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस बीच खड़े हनुमान की प्रतिमा को परमार काल से जोड़कर देखे जाने की चर्चा भी तेज है। इसके एक हजार वर्ष से अधिक पुरानी होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाने को लेक भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विस्थापन के बाद बदल जाएगा मुख
जानकारी के अनुसार अगर खड़े हनुमान की प्रतिमा को विस्थापित किया गया तो इसका मुख दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर हो जाएगा। इसी वजह से प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया को लेकर धार्मिक और तकनीकी दोनों तरह की चिंताएँ सामने आ रही हैं। मंदिर परिसर और आसपास भक्तों ने पोस्टर भी लगाए हैं। इनमें प्रशासन से जल्दबाजी नहीं करने की अपील की गई है। साथ ही प्रतिमा को हटाने से पहले तकनीकी परीक्षण और एक्सपर्ट्स से सुरक्षित प्रक्रिया् की पुष्टि कराने की मांग की गई है।
पिछले तीन दिन में उज्जैन प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को टस से मस नहीं कर सके,, अब मध्य प्रदेश पुलिस के जवान और अधिकारीगण बैंड बाजे के साथ हनुमान जी को मनाने पहुंचे है। #ujjain pic.twitter.com/7CPvZ9Bwr6
इस बीच मंगलवार की शाम हुई महाआरती
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसकी जद में आने वाले मंदिर, मस्जिद और दूसरे धार्मिक स्थलों के साथ दुकान और मकान भी हटाए जा रहे हैं। खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को विस्थापित करने की तैयारी भी राजसी सवारी से पहले शुरू हुई थी। 30 अगस्त को कार्रवाई के दौरान विरोध और चक्काजाम की स्थिति बन गई थी। इसके बाद कार्रवाई रोक दी गई। 4 सितंबर को करीब 16 घंटे चली कार्रवाईि में मंदिर का शिखर और आसपास का निर्माण हटाया गया। प्रतिमा की गहराई की जांच के दौरान रात करीब 10 बजे काम रोक दिया गया। इसके बाद 5 सितंबर को निगम की टीम रात करीब 1 बजे दोबारा पहुंचे। विरोध होने पर टीम को वापस लौटना पड़ा। अब निगम को विशेषज्ञों की जांच रिपोर्टा का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रतिमा को लेकर प्रशासन अगला कदम क्या उठाता है।