Sharad Navratri 2026: शक्ति की आराधना के पावन पर्व शारदीय नवरात्रि की आज से शुरुआत हो चुकी है। नवरात्रि के पहले दिन घरों से लेकर देवी मंदिरों तक घटस्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। इस वर्ष पूरे नौ दिनों का पूर्ण संयोग मिलने से श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिल रहा है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
राजधानी भोपाल के प्रसिद्ध देवी मंदिरों, जैसे काली माता मंदिर, कर्फ्यू वाली माता मंदिर और माता मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। माता के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के कारण सुबह के सामान्य मुहूर्त के बजाय अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक में घटस्थापना करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसके अलावा प्रदोष काल में अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की जाएगी। इस वर्ष ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार माता रानी का आगमन हाथी पर हुआ है, जिसे सुख, समृद्धि और उत्तम वर्षा का प्रतीक माना जाता है।
नौ दिनों होगी अलग-अलग स्वरूपों की आराधना
नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी और उन्हें उनकी पसंद के भोग अर्पित किए जाएंगे। श्रद्धालु व्रत रखकर दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और रामचरितमानस का पाठ कर रहे हैं।
महत्वपूर्ण तिथियां
18 अक्टूबर 2026: महाअष्टमी
19 अक्टूबर 2026: दुर्गा महानवमी
20 अक्टूबर 2026: विजयादशमी