भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना दूसरा गोल्ड मेडल हासिल कर 8वें पायदान पर आ गया है। पैरा शॉट पुट F57 वर्ग में शर्मिला धनखड़ ने सीजन का सर्वश्रेष्ठ 9.81 मीटर थ्रो कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस विजय ने भारत की मेडल टैली को नई मजबूती दी है। वहीं, पहला गोल्ड वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने भारत को पहला गोल्ड दिलाया था।
एक तरफ जहां भारत की शर्मिला ने गोल्ड जीता वहीं, इसी मुकाबले में शिल्पा के शायला ने भी ब्रॉन्ज मेडल जीता। सोमवार के मुकाबलों के बाद भार के कुल पदकों की संख्या 10 हो गई है। इससे अंक तालिका में भी उछाल आया है।
शर्मिला की मेहनत ने बदली किस्मत
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के चित्रौली गांव की रहने वाली शर्मिला धनखड़ का सफर आसान नहीं रहा। बचपन में पोलियो के कारण उनका एक पैर प्रभावित हो गया। वहीं, परिवार भी आर्थिक तंगी से जूझता रहा और बेहतर इलाज भी नहीं मिल सका। फिर कर उम्र में शादी हुई, लेकिन जीवन ने मुश्किल मोड़ दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 34 वर्ष की उम्र में उन्होंने कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में पैरा एथलेटिक्स की शुरूआत की और F57 सीटेड शॉट पुट इवेंट में प्रेक्टिस शुरू कर दी। बेटी की ट्रेनिंग जारी रखने के लिए साल 2023 में परिवार ने अपना घर तक बेच दिया। हालांकि शर्मिला ने तैयारी नहीं छोड़ी। अब उसी संघर्ष का परिणाम कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडल के रूप में सामने आया है।
दूसरी शादी के बाद से मिला खेल में नया अवसर
शर्मिला की 26 साल क उम्र में उन्हें पति ने घर से निकाल दिया। वह अपनी दो बेटियों को लेकर मायके लौट आईं। करीब 2 साल बाद अजीत से दूसरी सादी हुई। अजीत ने अखबार में पैरा एथलीट्स की खबर पढ़ने के बाद पत्नी को खेल में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। इतना ही नहीं फैसले के बाद हर कदम में साथ दिया। परिवार की इसी मदद ने इंटनेशनल लेवल तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई।
शिल्पा को रिव्यू के बाद मिला ब्रॉन्ज
वहीं, महिलाओं के शॉट पुट F57 फाइनल में शिल्पा शायला ने 7.26 मीटर तक व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। शुरूआती नतीजों में वह चौथे स्थान पर रहीं। हालांकि भारत की आपत्ति के बाद अधिकारियों ने नाइजीरिया की खिलाड़ी यूचेरिया इयियाजी के थ्रो को रिव्यू किया। जांच में उनका वैध माना गया प्रयास फाउल घोषित हुआ। इसके बाद संशोधित (Modified) परिणाम जारी किए गए और शिल्पा को ब्रॉन्ज मेडल दे दिया गया। हालांकि नाइजीरिया के स्टाफ ने फैसले के खिलाफ आधिकारिक आपत्ति दर्ज करा सकता है।

अन्य स्पर्धाओं में भी बढ़ा भारत का खाता
भारत ने अन्य स्पर्धाओं में भी शानदार प्रदर्शन जारी रखा। पुरुष हाई जंप में सर्वेश कुशारे ने 2.25 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता, जबकि 79 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में अजय बाबू वल्लुरी कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड से सिर्फ एक किलोग्राम पीछे रहते हुए सिल्वर पर कब्जा जमाया। वहीं, बिंदियारानी देवी ने 58 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज और ज्ञानेश्वरी यादव ने 53 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। ज्ञानेश्वरी ने स्नैच में गेम्स रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।
भारत की टैली में मिला बड़ा सहारा
सोमवार के मुकाबलों ने भारत की मेडल टैली को नई गति दी है। वेटलिफ्टिंग में अब तक भारत 6 पदक जीत चुका है। वहीं, पैरा स्पर्धाओं और एथलेटिक्स में भी लगातार सफलता मिल रही है। दूसरी ओर बॉक्सिंग में सचिन सिवाच और अंकुश क्वार्टर फाइनल में पहुंच गए हैं। हालांकि स्विमिंग, पैरा स्प्रिंट और 110 मीटर हर्डल्स जैसे कुछ मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ी पदक तक नहीं पहुंच सके। फिर भी शुरूआती चरण में भारत का प्रदर्शन कई स्पर्धाओं में मजबूत दावेदारी का संकेत दे रहा है।