क्रिकेट। युवा स्टार बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी इन दिनों भारतीय क्रिकेट में चर्चा का विषय बने हुए हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज में उन्हें टीम स्क्वायड में जगह मिली थी। लेकिन किसी भी मुकाबले में प्लेइनग इलेवन का हिस्सा नहीं बनाया गया। हालांकि इस फैसले से वैभव के फैंस नाराज दिखे।
वनडे और टी20 के अलावा वैभव ने दलीप ट्रॉफी में कुछ उपयोगी पारियाँ खेलकर लाल गेंद क्रिकेट यानी टेस्ट के लिए भी अपनी दावेदारी पेश करने का काम किया था। हालांकि यहीं से वैभव के टेस्ट भविष्य को लेकर बहस शुरू हो गई है। सवाल यह है कि टी20 में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचान बना चुके वैभव क्या टेस्ट क्रिकेट की लंबी चुनौती में भी सफल हो सकते हैं।
पनेसर ने तकनीक पर सवाल उठाए
पनेसर का मानना है कि लाल गेंद के क्रिकेट की जरूरतें टी20 से काफी अलग हैं। उनके अनुसार मौजूदा समय में हैरी ब्रूक जैसे कुछ ही खिलाड़ी हैं जो टेस्ट और टी20 दोनों में शीर्ष स्तर पर प्रभाव छोड़ रहे हैं। पनेसर ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें वैभव के टेस्ट क्रिकेट में सफल होने की संभावना अभी मजबूत नहीं दिखती।
आंकड़ों में टी20 और फर्स्ट क्लास का अंतर
वैभव के आंकड़े भी इस बहस को अलग अलग नजरिए देते हैं। सभी टी20 मैचों में उन्होंने करीब 43 के एवरेज से 1670 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 216. 32 रहा है। यह वैभव की आक्रामक बल्लेबाजी को दिखाता है। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में तस्वीर फिलहाल अगल है। वैभव ने 17 पारियों में 23.47 के एवरेज से 399 रन बनाए हैं। इसी आंकड़े को देखते हुए टेस्ट क्रिकेट में उनकी तैयारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि कम उम्र में मिले अनुभव और आगे आने वाले घरेलू मैच उनके लिए लाल गेंद के क्रिकेट में अपनी क्षमता साबित करने का मौका भी हो सकते हैं।
क्लार्क ने वैभव के समर्थन में दी बड़ी मिसाल
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क पनेसर की राय से सहमत नहीं हैं। क्लार्क का मानना है कि वैभव जैसे प्रतिभाशाली बल्लेबाज के पास एक से ज्यादा फॉर्मेट में अपनी पहचान बनाने की क्षमता हो सकती है। उन्होंने विराट कोहली और एबी डिविलियर्स का उदाहरण दिया। दोनों खिलाड़ी टी20 में आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने गए और टेस्ट क्रिकेट में भी बड़ा मुकाम हासिल किया। क्लार्क के अनुसार, अगर वैभव टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं तो उन्हें देखना दिलचस्प होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आखिरकार टेस्ट क्रिकेट खेलने की इच्छा वैभव की खुद की होनी चाहिए।