भारतीय मूल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश अंबाती को Apple में इंजीनियरिंग का वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया है। वह करीब 17 साल से कंपनी में काम कर रहे हैं। उनकी पदोन्नति Apple में वरिष्ठ पदों पर हुए बदलावों का हिस्सा है, उनके साथ लुई सांगुइनेटी और डेरेक शेफर को भी उपाध्यक्ष बनाया गया है।
राजेश अंबाती का काम उन तकनीकों से जुड़ा है जिनकी मदद से iPhone और Apple के दूसरे डिवाइस मोबाइल नेटवर्क, वायरलेस कनेक्शन और सैटेलाइट सेवाओं से जुड़ते हैं ।
Apple में कैसा रहा उनका सफर?
राजेश अंबाती अक्टूबर 2009 में Apple से जुड़े थे। इससे पहले वह करीब सात साल तक Motorola में इंजीनियरिंग मैनेजर के रूप में काम कर चुके थे। Apple में शुरुआत उन्होंने सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग मैनेजर के तौर पर की थी । अक्टूबर 2014 में उन्हें सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का डायरेक्टर बनाया गया। इसके बाद अक्टूबर 2019 में वह सीनियर डायरेक्टर बने।
उपाध्यक्ष बनने से पहले वह कंपनी में कनेक्टिविटी, मोबाइल नेटवर्क और सैटेलाइट से जुड़े सॉफ्टवेयर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके काम में सॉफ्टवेयर तैयार करने, उसकी जांच करने और अलग-अलग नेटवर्क पर उसकी विश्वसनीयता बनाए रखने जैसे काम शामिल हैं ।
कहां से की पढ़ाई?
राजेश अंबाती ने अमेरिका के स्टीवंस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की है । उन्होंने स्टैनफोर्ड कंटीन्यूइंग स्टडीज के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस से जुड़े विषयों की पढ़ाई भी की है। इसके अलावा, उन्होंने रटगर्स बिजनेस स्कूल में मैनेजमेंट रणनीति का अध्ययन किया है।
उनकी नई जिम्मेदारी Apple के उन तकनीकी कामों से जुड़ी है जो कंपनी के डिवाइसों को मोबाइल नेटवर्क और दूसरी कनेक्टिविटी सेवाओं से जोड़ने में मदद करते हैं।