आज की भागती-दौड़ती जिंदगी में हम अक्सर बाहरी दुनिया की चुनौतियों के बीच इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने भीतर मौजूद आत्मा की आठ शक्तियों की ओर हमारा ध्यान ही नहीं जाता। जबकि ये शक्तियाँ हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और इनकी अनुभूति हमें अपने दैनिक जीवन में कई बार होती है। आवश्यकता है इन शक्तियों का विकास करने और जीवन में इनका सही तरीके से उपयोग करने की।
1. समेटने की शक्ति: अर्थात अपने मन और बुद्धि को अनावश्यक विचारों से हटाकर आवश्यक विचारों पर एकाग्र करना। इससे हमें सही समय पर सही विचार चुनने और व्यर्थ विचारों को छोड़ने में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, जब हम कहीं बाहर जाते हैं, तो अपने बैग में आवश्यक सामान रखते हैं, पूरे घर का सामान नहीं रखते। ठीक इसी प्रकार, हमें अपने मन में भी सकारात्मक और उपयोगी विचारों को ही जगह देनी चाहिए।
2. सहन शक्ति: आज लोग कहते हैं, ‘बहुत हो गया, अब हम सहन नहीं कर सकते।’ लेकिन सहन करना कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि यह भी एक शक्ति है। जैसे एक कलाकार जब छैनी-हथौड़ी से पत्थर को तराशता है, तो वह पत्थर चोट सहते-सहते एक सुंदर मूर्ति बन जाता है। ठीक इसी प्रकार, हमें अपने शुभचिंतकों के साथ छोटी-छोटी बातों पर तकरार करने के बजाय मिलनसार बनकर चलना चाहिए। इससे हमारी सहनशक्ति जाग्रत होती है।
3. समाने की शक्ति: अर्थात उन बातों को समाहित कर लेना, जिनसे मन में हलचल पैदा होती है। जैसे नदियाँ जब समुद्र में जाकर मिलती हैं, तो समुद्र उन्हें अपने भीतर समा लेता है। ऐसी ही विशाल स्थिति और समाने की शक्ति हमारे अंदर होनी चाहिए, ताकि किसी भी बात की वजह से हमारे जीवन में उथल-पुथल न मचे। इसके लिए हमें दया और क्षमा जैसे गुणों को अपनाना होगा।
4. परखने की शक्ति: यह शक्ति हमें हर प्रकार के धोखे से बचाती है। जैसे एक पारखी आभूषणों को कसौटी पर परखकर असली और नकली की पहचान कर लेता है, वैसे ही हमें हर परिस्थिति में अपनी परखने की शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
5. निर्णय करने की शक्ति: अर्थात सही समय पर सही निर्णय लेना। जीवन में कई बार हम यह तय नहीं कर पाते कि हमारे लिए क्या सही है और क्या गलत। इससे चिंता और अवसाद भी पैदा हो सकते हैं। जब हमारी परखने की शक्ति विकसित हो जाती है, तो निर्णय लेने की शक्ति भी स्वतः जाग्रत होने लगती है। इससे भटकाव कम होता है और हम सही-गलत का निर्णय करने में सक्षम हो जाते हैं।
6. सामना करने की शक्ति: इसका अर्थ है कि हमारे जीवन में कैसी भी कठिन परिस्थिति आए, हम अंदर से इतने मजबूत हों कि उसका सामना कर सकें। इसके लिए हमें निर्भयता, आत्मविश्वास और धैर्य जैसे गुणों का विकास करना होगा।
7. सहयोग की शक्ति: जब हम निःस्वार्थ भाव से दूसरों को सहयोग देते हैं, तो यह सिद्धांत लागू होता है कि हम जो देते हैं, वही हमें मिलता है। अर्थात हमें भी दूसरों का सहयोग स्वतः मिलने लगता है।
8. विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति: जैसे कछुआ जब चाहे अपने अंगों को बाहर निकाल सकता है और जब चाहे उन्हें समेट सकता है, ठीक इसी प्रकार हमें भी अपनी कर्मेंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि क्या देखना है, क्या सुनना है और क्या बोलना है।
यदि हम प्रतिदिन दिन की शुरुआत में थोड़ा समय सकारात्मक चिंतन और राजयोग ध्यान के अभ्यास के लिए निकालें, तो निश्चित ही इन आठ शक्तियों का विकास कर अपने जीवन को बेहतर, सुखद और आनंदमय बना सकते हैं।

बी. के. प्रहलाद
(लेखक मोटिवेशनल स्पीकर, आध्यात्मिक मार्गदर्शक एवं राजयोग ध्यान विशेषज्ञ हैं।)