केवड़िया, गुजरात। अनिता चौधरी।
केवड़िया में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में डॉक्यूमेंट्री ‘मैं निदा’ को सर्वश्रेष्ठ कला एवं संस्कृति फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। फिल्म के निर्माता-निर्देशक अतुल गंगवार का निदा फाजली से करीब 20 साल पुराना रिश्ता रहा है। ‘स्वदेश’ से बातचीत में गंगवार ने कहा, “निदा फाजली मेरे लिए आधुनिक युग के कबीर थे। उन्होंने जो कहा, सबके लिए कहा और बेबाकी से कहा।”
गंगवार ने बताया कि डॉक्यूमेंट्री बनाने का विचार निदा के व्यक्तित्व के उन पहलुओं को सामने लाने से जुड़ा था, जो उनकी लोकप्रिय शायरी के पीछे छिपे रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि निदा सिर्फ बड़े शायर नहीं, बल्कि आम आदमी के शायर थे। उनकी रचनाओं में रिश्ते, अकेलापन, अधूरापन और रोजमर्रा की जिंदगी सहज भाषा में दिखाई देती है।
गंगवार के मुताबिक निदा की एक पंक्ति है-एक आदमी के भीतर कई आदमी होते हैं। इसी तरह उनके भीतर भी कई रूप थे-शायर, इंसान, विचारक और संवेदनशील व्यक्तित्व। ‘मैं निदा’ में इन्हीं अलग-अलग पहलुओं को समझने की कोशिश की गई है।
निदा के भारत से जुड़ाव को याद करते हुए गंगवार ने कहा कि उनका परिवार पाकिस्तान चला गया था, लेकिन उन्होंने भारत को चुना और यह जुड़ाव उनकी शायरी में भी दिखाई देता है। पाकिस्तान में उनकी एक रचना पर कुछ मौलवियों ने सवाल उठाए थे, लेकिन निदा अपने मानवीय दृष्टिकोण पर कायम रहे। गंगवार ने कहा कि निदा धार्मिक पहचान से पहले इंसान को देखते थे।
राष्ट्रीय सम्मान पर उन्होंने कहा कि यह खुशी उनके लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें निदा साहब का स्नेह महसूस होता है। गंगवार को उम्मीद है कि फिल्म के जरिए नई पीढ़ी निदा की किताबों और शायरी तक पहुंचेगी। “अगर कुछ युवा निदा साहब को पढ़ना शुरू करते हैं तो इससे बड़ी उपलब्धि मेरे लिए कुछ नहीं होगी।”

(लेखिका स्वदेश दिल्ली में वरिष्ठ विशेष प्रतिनिधि हैं)