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रांची/डेस्क: स्विटजरलैंड के शांति समझौते के बाद अमेरिका और ईरान में फिर से बढ़ी तनातनी पर विराम लगने वाला है. दोनों देश एक बार फिर से शांति वार्ता के लिए तैयार हो गये हैं. इसके साथ होर्मूज स्ट्रेट को लेकर पूरी दुनिया की परेशानी के कम होने की उम्मीद भी बंध गई है. पश्चिम एशियाई देश ईरान पर एक बार फिर शुरू किए गये अमेरिकी हमले के बाद जो संकट और आशंकाएं बन गए थे और युद्ध के बादल छाने लगे थे, उसके छंटने की राहत भरी खबर आई है. बार-बार आस्तीनें मोड़ने वाले अमेरिका और ईरान आपसी सैन्य हमलों को रोकने पर सहमत हो गए हैं. दोनों देशों के बीच फिर से वार्ता होने जा रही है, इस बार यह वार्ता कतर में होनी है. अब इस वार्ता पर पूरी दुनिया की निगाहें टिक गई हैं.
स्विटजरलैंड में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता हुई थी. इस शांति वार्ता के बाद सीजफायर लागू हुआ था, लेकिन पिछले दो-तीन दिनों से अमेरिका ईरान पर लगातार हमले किए जा रहा था. ईरान ने भी जवाबी हमला किया था. दोनों ही ओर से एक-दूसरे के ठिकानों पर कई हमले किए गए, जिससे इस समझौते के टूटने का खतरा पैदा हो गया था और दुनिया होर्मुज स्ट्रेट के एक बार फिर बंद होने की आशंका से परेशान हो उठी थी. उधर ‘एक्सियोस’ की एक रिपोर्ट में वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दावा किया गया है कि दोनों पक्ष फिलहाल सैन्य हमले रोकने पर फिलहाल राजी हो गए हैं.
अब दोनों देशों के अधिकारी तनाव कम करने के लिए कतर की राजधानी दोहा में मिलेगे. यह बैठक मंगलवार को होने वाली है. दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडल एक मेज पर बैठेंगे ताकि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज‘ को लेकर उत्पन्न संकट का समाधान निकाला जा सके. बता दें कि अमेरिका ने हाल में जो ताजा हमले किए थे, वह होर्मुज जलमार्ग को लेकर उत्पन्न विषम स्थिति के कारण किए थे. फिलहाल राहत की बात यह है कि बातचीत की प्रक्रिया जारी रहने के दौरान होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक जारी रहेगी.
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