नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव (सीएससी) की 9वीं डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (डीएनएसए) स्तर की बैठक बुधवार को भारत की मेजबानी में वर्चुअल माध्यम से आयोजित हुई। बैठक में भारत के अलावा बांग्लादेश, मालदीव, मॉरिशस, श्रीलंका और सेशेल्स ने हिस्सा लिया।
बैठक में सदस्य देशों ने 20 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित सीएससी की 7वीं नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर स्तर की बैठक में लिए गए फैसलों की समीक्षा की। इसके साथ ही 2025-26 के लिए तय सहयोग और गतिविधियों के रोडमैप की भी समीक्षा की गई।
पांच प्रमुख स्तंभों पर प्रगति की समीक्षा
सदस्य देशों ने सीएससी के पांच प्रमुख सहयोग स्तंभों के तहत प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। बैठक में सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए क्षमता निर्माण को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। बैठक में हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया गया। इसके साथ ही मानवीय सहायता और आपदा राहत के क्षेत्र में जारी साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
भारत की ओर से पवन कपूर ने किया प्रतिनिधित्व
बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (रणनीतिक मामले) पवन कपूर ने किया। बांग्लादेश की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय के सशस्त्र बल प्रभाग के महानिदेशक ब्रिगेडियर जनरल मुहम्मद अली हैदर सिद्दीकी, मालदीव की ओर से डिप्टी एनएसए मेजर जनरल हामिद शफीक (सेवानिवृत्त), मॉरिशस की ओर से कार्यवाहक प्रधान समन्वयक (सुरक्षा मामले) के. जयप्रकाश, सेशेल्स की ओर से राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोएल मॉर्गन और श्रीलंका की ओर से रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पी.डी. इंडिका एल. विजेगुनावरदाना शामिल हुए।
सीएससी सचिवालय का प्रतिनिधित्व महासचिव वाइस एडमिरल एस.एन. घोरमडे (सेवानिवृत्त) ने किया। उन्होंने हाल में श्रीलंका के कोलंबो में सीएससी महासचिव के रूप में कार्यभार संभाला है।
क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण मंच
कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच समुद्री और क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद एवं कट्टरपंथ से मुकाबला, मानव तस्करी तथा आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का मंच है। नई बैठक में सदस्य देशों ने सुरक्षा सहयोग को संस्थागत रूप से मजबूत करने और प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण के जरिए साझा चुनौतियों से निपटने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया।