नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बुधवार को दो बिल्कुल अलग सियासी तस्वीरें सामने आईं। इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में 25 साल पूरे होने का आयोजन किया। वहां प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीतिक सफर पर बात की और 2047 तक विकसित भारत का आह्वान दोहराया।
इसी दौरान दूसरी तरफ कुछ किलोमीटर दूर कांग्रेस समेत विपक्षी नेता लगातार दूसरे दिन सड़क पर उतरे। उनके निशाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची का चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR था।
लंच से शुरू हुई विपक्ष की बुधवार की रणनीति
विपक्ष की बुधवार की गतिविधि मार्च से नहीं, लंच से शुरू हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इंडिया गठबंधन के सांसदों को जनपथ और कनॉट प्लेस इलाके के सागर रत्ना रेस्टोरेंट में बुलाया। मंगलवार को पुलिस से हुए टकराव के बाद यह बैठक आंदोलन की अगली दिशा तय करने के लिए रखी गई थी। राजद सांसद मनोज झा ने शब्दों के खेल में कहा कि लंच होगा, शायद लॉन्च भी होगा। बैठक के बाद खड़गे ने ऐलान किया कि विपक्षी सांसद जंतर मंतर की तरफ बढ़ेंगे। रेस्टोरेंट के बाहर खड़ी बसों से नेता प्रदर्शन स्थल की ओर रवाना हुए। दिल्ली पुलिस ने चुनाव आयोग, संसद मार्ग और आसपास की सड़कों पर सुरक्षा बढ़ा दी।
राहुल गांधी ने कहा कि मंगलवार को करीब 300 सांसद चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें आगे नहीं जाने दिया गया। इसलिए सांसद जंतर मंतर जाकर अपनी बात देश के सामने रखेंगे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और चुनाव आयोग पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का आरोप लगाया। चुनाव आयोग और सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
मंगलवार को आठ घंटे से ज्यादा चला धरना
मंगलवार को इंडिया गठबंधन के सांसद संसद के पास जमा हुए और चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन की ओर मार्च शुरू किया। मार्च में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, खड़गे, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के नेता और कई विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए। नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के पास पुलिस बैरिकेड ने उन्हें रोक दिया। अखिलेश यादव और तृणमूल के सांसदों समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। राहुल और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में दाखिल हो गए। आगे न जा पाने पर वे वहीं धरने पर बैठ गए।
धरना आठ घंटे से ज्यादा चला। देर शाम पुलिस ने राहुल, प्रियंका और बाकी प्रदर्शनकारियों को परिसर से हटाकर बसों और पुलिस वाहनों में बैठाया। बाद में सभी को छोड़ दिया गया। सरकारी परिसर में घुसने को लेकर राहुल और प्रियंका के खिलाफ पुलिस ने मामला भी दर्ज किया। हटाए जाते वक्त प्रियंका गांधी ने कहा कि उनका संघर्ष जारी रहेगा और सब कुछ याद रखा जाएगा। एफआईआर के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि उन पर पहले से करीब 45 मामले हैं और उनका लक्ष्य 100 का है। उन्होंने हर एफआईआर को मेडल बताया।
विपक्ष की तीन मांगें और चुनाव आयुक्तों के नोट का विवाद
विपक्ष का अभियान तीन मांगों पर टिका है। पहली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा। दूसरी, चल रहे SIR को वापस लेना। तीसरी, मतदाता सूची से कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए गए नामों की बहाली। विवाद तब और बढ़ा जब इंडियन एक्सप्रेस की एक पड़ताल में बताया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूची की प्रक्रिया और फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कीं। चुनाव आयोग ने इन नोट्स के होने की बात मानी, पर उन्हें सुझाव और टिप्पणियां बताया, जो सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने कहा कि कई सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था में मतभेद स्वाभाविक हैं और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
खड़गे के लंच में नहीं दिखी सपा
बुधवार की गोलबंदी में विपक्षी खेमे की कुछ उलझनें भी दिखीं। मंगलवार के मार्च में प्रमुखता से शामिल रही समाजवादी पार्टी खड़गे के लंच में मौजूद नहीं थी। अखिलेश यादव खुद मंगलवार को प्रदर्शन में शामिल थे और हिरासत में लिए गए नेताओं में थे। सपा की गैरमौजूदगी पर अलग अलग खबरें आईं और उस समय दोनों पक्षों की ओर से कोई साफ सार्वजनिक वजह नहीं बताई गई।
इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में मोदी का संबोधन
उधर इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में प्रधानमंत्री मोदी विकसित भारत संकल्प सभा को संबोधित कर रहे थे। मोदी 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे और मई 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में दिल्ली आए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कार्यक्रम की शुरुआत में मोदी के सफर को जनसेवा और राजनीतिक दृढ़ता का सफर बताया।
पीएम मोदी ने अपने सरकारी कार्यकाल पर नजर डाली। लेकिन ज्यादा जोर 2047 की राह पर दिया। उन्होंने राष्ट्र प्रथम की बात की और कहा कि उनका लक्ष्य विकसित भारत है। उन्होंने सभा में कहा कि वे इस लक्ष्य के लिए न रुकेंगे और न थकेंगे। मोदी ने अपने सफर में राजनीतिक विपक्ष की भूमिका का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक जिन्होंने उनका विरोध किया, उन्होंने उन्हें लोकतंत्र की ताकत सिखाई। एक ही दिन, एक ही शहर में लोकतंत्र दो अलग राजनीतिक कहानियों का हिस्सा बना रहा।