भारतीय वायुसेना को स्वदेशी विमान निर्माण की दिशा में बड़ी मदद मिली है हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने पहले तीन HTT-40 बेसिक ट्रेनर विमान वायुसेना को सौंप दिए हैं, हालांकि, इन विमानों से नए पायलटों की नियमित ट्रेनिंग शुरू होने में करीब दो साल तक लग सकते हैं । वजह सिर्फ विमानों की संख्या नहीं, बल्कि प्रशिक्षित फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर तैयार करना और ट्रेनिंग की पूरी व्यवस्था बनाना भी है।
पहले प्रशिक्षकों को दी जाएगी ट्रेनिंग
शुरुआत में इन विमानों को चेन्नई के पास तांबरम स्थित फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल में इस्तेमाल किया जाएगा। यहां प्रशिक्षक HTT-40 उड़ाने का अनुभव हासिल करेंगे। वे विमान के संचालन की प्रक्रिया, ट्रेनिंग का सिलेबस और पायलटों के कौशल से जुड़े मानक भी तैयार करेंगे ।
वायुसेना हैदराबाद के पास स्थित एयर फोर्स अकादमी में नए पायलटों की ट्रेनिंग के लिए इन विमानों को तब तैनात करेगी। जब उसके पास करीब 25 से 30 HTT-40 विमानों का बेड़ा और पर्याप्त प्रशिक्षित इंस्ट्रक्टर होंगे ।
6,838 करोड़ रुपये में खरीदे जाएंगे 70 विमान
वायुसेना ने अपनी शुरुआती पायलट ट्रेनिंग की जरूरत पूरी करने के लिए HAL को 70 HTT-40 विमानों का ऑर्डर दिया है। इस सौदे की कीमत करीब 6,838 करोड़ रुपये है ।

HTT-40 में आधुनिक एवियोनिक्स, दो सीटों वाला कॉकपिट और इजेक्शन सीट जैसी सुविधाएं हैं। फिलहाल नए पायलटों की शुरुआती ट्रेनिंग स्विस कंपनी के PC-7 MkII विमानों पर होती है । HTT-40 के शामिल होने से इस जरूरत को स्वदेशी विमान से पूरा करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, विमानों का उत्पादन बढ़ाने के लिए इंजन की नियमित सप्लाई भी जरूरी है । इंजन उपलब्धता स्थिर होने पर HAL बेंगलुरु और नासिक में मिलाकर सालाना 20 HTT-40 विमान बनाने की क्षमता रखता है।