नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के मुखिया के रूप में 25 साल पूरे कर लिए हैं। बुधवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में विकसित भारत संकल्प सभा हुई। इसमें प्रधानमंत्री ने इस पड़ाव को पीछे देखने का मौका कम और आगे की राह तय करने का मौका ज्यादा बताया। स्टेडियम में कार्यकर्ताओं ने फूलों, भाजपा के झंडों और भारत माता की जय के नारों के साथ मोदी का स्वागत किया।
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आज उन्हें लगातार 25 साल सरकार के मुखिया के तौर पर सेवा करते हुए पूरे हो गए हैं। उन्होंने इसका श्रेय जनता के आशीर्वाद को दिया। साथ ही भाजपा, एनडीए और उन सहयोगियों का आभार जताया, जिन्होंने लोकतंत्र में भरोसा बनाए रखा।
7 अक्टूबर 2001 से शुरू हुआ सफर
यह सफर 7 अक्टूबर 2001 को शुरू हुआ था, जब मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे करीब 13 साल तक राज्य की कमान संभालते रहे। 2014 में भाजपा को लोकसभा में बहुमत मिला तो वे गांधीनगर से दिल्ली पहुंचे। 2019 में दोबारा बहुमत मिला और 2024 के चुनाव के बाद एनडीए की सरकार बनी, तो उन्होंने तीसरा कार्यकाल शुरू किया। गौर करने वाली बात यह है कि 2001 में मुख्यमंत्री बनने से पहले मोदी कभी किसी चुने हुए कार्यकारी पद पर नहीं रहे थे।
भाषण में क्या बोले मोदी
मोदी ने बताया कि इन सालों ने उन्हें क्या सिखाया। उनके मुताबिक समर्थकों से ताकत मिली, आलोचकों ने खुद के भीतर झांकने को मजबूर किया और विरोधियों ने लोकतंत्र की ताकत समझाई। उन्होंने 2001 के गुजरात भूकंप को पुनर्निर्माण के दौरान डटे रहने की सीख बताया। कोविड महामारी को उन्होंने पूरे देश की सामूहिक ताकत की मिसाल कहा।
अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए उन्होंने वडनगर का जिक्र किया। मोदी ने कहा कि वे हमेशा कक्षा में जल्दी पहुंचकर सीखने को उत्सुक रहते थे और यह आदत आज भी बनी हुई है। 25 साल बाद भी वे खुद को एक विद्यार्थी ही मानते हैं। दिन की शुरुआत उन्होंने दिल्ली के श्री विनायक मंदिर में पूजा से की। मोदी ने बताया कि उन्होंने देश के 140 करोड़ लोगों के लिए प्रार्थना की और ज्यादा ऊर्जा से सीखते रहने और सेवा करने की शक्ति मांगी।
"We'll do it..." आज का दिन सिर्फ यादों के लिए नहीं बल्कि नए संकल्पों को नई ऊर्जा से भरने का दिन है। - प्रधानमंत्री आदरणीय श्री @narendramodi जी #25YearsOfSeva #SevaJyotiYatra #सेवा_संकल्प_अभियान #SevaSankalpAbhiyan https://t.co/vRMDPipkls
— Hemant Khandelwal (@Hkhandelwal1964) October 7, 2026
विकसित भारत 2047 पर जोर
भाषण का केंद्र विकसित भारत 2047 का लक्ष्य रहा। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने, ओलंपिक की मेजबानी करने और अंतरिक्ष में मौजूदगी बढ़ाने की बात करते हुए मोदी ने बार-बार दोहराया, हम करके दिखाएंगे। उनका संदेश साफ था कि 7 अक्टूबर सिर्फ अतीत को याद करने का दिन नहीं रहना चाहिए। यह आगे के संकल्प को नई धार देने का दिन भी बने।
उन्होंने यह भी माना कि इन 25 सालों में तीखी राजनीतिक लड़ाइयां, आलोचना और उनकी सरकारों के कई फैसलों पर बहस भी हुई। मोदी ने इसे कहानी से बाहर नहीं रखा। उनका कहना था कि जीत, हार, विरोध और आलोचना, सबने उनकी राजनीतिक समझ गढ़ी है।
भाजपा अध्यक्ष ने गिनाईं उपलब्धियां
कार्यक्रम में मोदी से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने संबोधित किया। उन्होंने इन 25 सालों को संघर्ष, जनसेवा और राजनीतिक दृढ़ता से बनी यात्रा बताया। नबीन के अनुसार मोदी इस सोच के साथ राजनीति में आए कि सत्ता लक्ष्य नहीं, सेवा का साधन होनी चाहिए। नबीन ने गुजरात के दौर को केंद्र की सरकार से जोड़ा। उन्होंने बुनियादी ढांचे और विकास के साथ काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक और अयोध्या के राम मंदिर का नाम लिया। उनका तर्क था कि इस दौरान विकास और सांस्कृतिक विरासत साथ चले। यह भाजपा अध्यक्ष का अपना आकलन है।
देशभर में सेवा संकल्प अभियान
दिल्ली का यह आयोजन भाजपा के सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा है। यह अभियान 17 सितंबर से शुरू हुआ और 17 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें रक्तदान शिविर, स्वच्छता कार्यक्रम, प्रदर्शनियां, युवा गतिविधियां और वडनगर को वाराणसी से जोड़ने वाली यात्राएं शामिल हैं। वडनगर मोदी की जन्मभूमि है और वाराणसी उनका लोकसभा क्षेत्र। देशभर के कार्यक्रमों से वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री जुड़े। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गाजियाबाद से और जेपी नड्डा नोएडा से शामिल हुए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक प्रदेश के कार्यक्रमों से जुड़े। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े अयोध्या से शामिल हुए।
एक दिन पहले केंद्रीय कैबिनेट ने भी एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री को लगातार 25 साल सरकार के मुखिया रहने पर बधाई दी। प्रस्ताव में गुजरात की स्वागत शिकायत निवारण व्यवस्था और ज्योतिग्राम जैसी पहलों से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचे और डिजिटल गवर्नेंस तक का जिक्र किया गया।