बालाघाट के कारांजा में सरसंघचालक ने किया स्मृति भवन और देवरस नेत्रालय भवन का लोकार्पण
बालाघाट:राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का कहना है कि जहां प्रत्यक्ष कार्य हो रहा होता है, वहां अधिक बोलने की आवश्यकता नहीं होती है। भाषण महत्वपूर्ण नहीं होता है, कार्य महत्वपूर्ण होता है। बोलना तो समाप्त हो जाता है और लोग उसको भूल भी जाते हैं, लेकिन कार्य निरंतर चलता रहता है।
डॉ. भागवत ने यह बात आज बालाघाट जिले में बालासाहेब देवरस एवं भाऊराव देवरस न्यास द्वारा कारांजा में निर्मित स्मृति भवन तथा माध्यमिक नेत्रालय का लोकार्पण करते हुए कही। उन्होंने कहा कि बालासाहेब और भाऊराव देवरस का पूरा जीवन राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता और संगठन विस्तार के लिए समर्पित रहा।इस दौरान मंच पर मध्य क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, स्व. लक्ष्मण राव मानकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र आर्थिक विकास परिषद के अध्यक्ष अतुल शिरोढ़कर तथा माधव नेत्रालय के अध्यक्ष निखिल प्रभाकर मुंडले उपस्थित थे।
इस अवसर पर डॉ. भागवत ने कहा कि संघ का काम ही सेवा करना है। उन्होंने कहा कि परोपकार को ही सेवा कहा जाता है। इसे अंग्रेजी में सर्विस कहा जाता है, लेकिन यह सर्विस नहीं है। सर्विस में लोगों को भुगतान मिलता है, लेकिन सेवा में ऐसा नहीं होता है। सेवा उपकार नहीं है, यह जीवों पर दया है। बालासाहेब और भाऊराव का जीवन ऐसा ही था। वे समाज के लिए जिए।उन्होंने बालासाहेब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे सबके लिए सहज रहे और उनसे हर कोई बिना किसी संकोच के मिल सकता था।
पायलट स्मित मच्छार की प्रशंसा की
डॉ. भागवत ने अपने संबोधन में पायलट स्मित मच्छार की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमारा देश और हमारी मिट्टी ही ऐसी है कि निस्वार्थ भाव से देश की सेवा की जाती रही है। यही हमारी परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि दूसरों का दुख देखकर उसे दूर करना भी हमारी संस्कृति है। मच्छार इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
उन्होंने कहा कि घायल होने के बाद भी मच्छार ने अपनी जान की परवाह नहीं की और अपने प्राणों की रक्षा किए बगैर उन्होंने अपने सभी यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया।उद्बोधन से पूर्व डॉ. भागवत ने दत्तात्रेय मंदिर में पूजन कर स्मृति भवन और बालासाहेब देवरस नेत्रालय का लोकार्पण किया। उन्होंने यहां सुरभि गौशाला का निरीक्षण भी किया।