भारत की आजादी से जुड़े ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले जौहरी थिरु वुम्मिदी एथिराज का बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में निधन हो गया वे 99 साल के थे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक जताया और सेंगोल बनाने में उनके योगदान को याद किया
सेंगोल वही राजदंड है, जिसे 1947 में देश की आजादी के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था। करीब 76 साल बाद, 28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इसे लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के पास स्थापित किया था।
22 साल की उम्र में सेंगोल बनाने में निभाई भूमिका
सेंगोल बनाने का काम तमिलनाडु के तिरुवावदुथुरै अधीनम मठ की पहल पर चेन्नई के वुम्मिदी बंगारू चेट्टी ज्वेलर्स को सौंपा गया था। उस समय एथिराज करीब 22 साल के थे। इस काम में उनके साथ वुम्मिदी सुधाकर और अन्य कारीगर भी शामिल थे । करीब पांच फीट लंबे सेंगोल पर सोने की परत चढ़ी हुई है। इसके शीर्ष पर नंदी की आकृति बनी है, जिसे न्याय और स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है।
सेंगोल की पहचान 71 साल तक परिवार को नहीं थी
आजादी के बाद सेंगोल को प्रयागराज के इलाहाबाद म्यूजियम में नेहरू गैलरी में रखा गया था। वहां इसे नेहरू को उपहार में मिली सुनहरी छड़ी के रूप में दर्ज किया गया था, 2018 में तमिल पत्रिका में इससे जुड़ा लेख प्रकाशित होने के बाद वुम्मिदी परिवार की नई पीढ़ी को इसके निर्माण में अपने परिवार की भूमिका के बारे में पता चला ।
इसके बाद परिवार ने सेंगोल की तलाश शुरू की, 2019 के आसपास इलाहाबाद म्यूजियम में रखे राजदंड की पहचान की पड़ताल की गई। उस पर तमिल अक्षरों और नंदी की आकृति से परिवार ने इसे पहचाना ।
2023 में संसद भवन में मिली नई पहचान
28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित किया गया। केंद्र सरकार ने इसे भारतीय परंपरा, न्यायपूर्ण शासन और आजादी से जुड़े प्रतीक के तौर पर पेश किया ।
एथिराज भी उस समारोह में शामिल हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मुलाकात कर सेंगोल के निर्माण में उनके योगदान के लिए आभार जताया था। उनके निधन के साथ उस ऐतिहासिक राजदंड को बनाने वाले प्रमुख कारीगरों में से एक का जीवन सफर समाप्त हो गया ।