Share Market News: तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने तेजी के साथ शुरुआत की, लेकिन शुरुआती बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। सेंसेक्स और निफ्टी जल्द ही दबाव में आ गए। आईटी शेयरों में खरीदारी के बावजूद महंगे कच्चे तेल, कमजोर वैश्विक संकेतों और निवेशकों की सतर्कता ने बाजार की चाल धीमी कर दी।
23 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 416.25 अंक चढ़कर 73,665.64 पर खुला। वहीं, निफ्टी 50 ने 54.55 अंक की बढ़त के साथ 22,742.20 का स्तर छुआ। बैंक निफ्टी भी शुरुआती कारोबार में 40.05 अंक ऊपर 54,965.75 पर पहुंचा। लेकिन कुछ ही देर बाद तस्वीर बदलने लगी और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करने लगे।
IT शेयरों में तेजी, फिर भी बाजार नहीं संभला
शुरुआती कारोबार में आईटी कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। टीसीएस के शेयर 2.63%, इंफोसिस 1.53%, एचसीएल टेक 1.22% और विप्रो 0.85% तक चढ़े। निफ्टी आईटी इंडेक्स में भी 300 से अधिक अंकों की तेजी दर्ज की गई।इसके बावजूद व्यापक बाजार में मजबूती नहीं बन पाई। निफ्टी शुरुआती बढ़त गंवाकर 100 से ज्यादा अंक नीचे आ गया, जबकि सेंसेक्स में भी 150 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। बैंक निफ्टी पर दबाव और ज्यादा रहा तथा इसमें 500 से अधिक अंकों की कमजोरी देखी गई।यानी आईटी शेयरों की खरीदारी बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। निवेशकों का ध्यान अब वैश्विक संकेतों, ऊर्जा की कीमतों और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर है।
114 डॉलर के करीब कच्चा तेल, बाजार के लिए बढ़ी चिंता
बाजार पर दबाव की बड़ी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ सकता है।इसका असर परिवहन, विमानन और तेल पर निर्भर दूसरे कारोबारों पर भी पड़ सकता है। निवेशक इसी जोखिम को ध्यान में रखकर शेयरों में खरीदारी को लेकर सतर्क हैं।
रुपये में मामूली मजबूती, लेकिन वैश्विक बाजार कमजोर
शुक्रवार को रुपये ने भी हल्की मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। गुरुवार को 94.82 रुपये प्रति डॉलर पर बंद होने के बाद रुपया तीन पैसे मजबूत होकर 94.79 रुपये प्रति डॉलर पर खुला।हालांकि, वैश्विक बाजारों से मजबूत संकेत नहीं मिले। एशियाई बाजारों में कमजोरी रही और अमेरिकी शेयर बाजार भी गुरुवार को ज्यादातर गिरावट के साथ बंद हुए। ऐसे माहौल में घरेलू बाजार में तेजी टिक पाना मुश्किल नजर आया।इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर कंपनियों के बढ़ते खर्च और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को लेकर भी निवेशक सतर्क हैं। अब सितंबर तिमाही के नतीजों पर नजर है। कंपनियों की कमाई से पता चलेगा कि महंगे कच्चे तेल और कमजोर वैश्विक माहौल के बीच उनके कारोबार पर कितना असर पड़ा है।
अगले सप्ताह बाजार को मिल सकता है सहारा
शुक्रवार की कमजोरी के बीच बाजार के लिए कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं। अमेरिकी 10 साल के बॉन्ड की यील्ड में गिरावट और रुपये में मजबूती से निवेशकों की धारणा को सहारा मिल सकता है। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले कारोबारी सत्रों में साफ होगा।जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर भी बाजार में चर्चा है। खबर के मुताबिक, आईपीओ में पिछले दो दिनों में करीब 3.73 लाख करोड़ रुपये की बोलियां मिली हैं। अलॉटमेंट प्रक्रिया पूरी होने के बाद निवेशकों के खाते में लौटने वाली रकम से बाजार में नकदी की उपलब्धता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।हालांकि, यह पूरी रकम सीधे शेयर बाजार में निवेश होगी, ऐसा मानना सही नहीं होगा। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि निवेशक अलॉटमेंट के बाद अपनी पूंजी का इस्तेमाल कहां करते हैं।
लार्ज-कैप शेयरों पर नजर, मिड और स्मॉल-कैप में जोखिम
मौजूदा माहौल में बड़ी कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत आकर्षक नजर आ सकते हैं, खासकर उन कंपनियों के जिनकी कमाई और कारोबारी स्थिति मजबूत है। बाजार में तेजी लौटने पर लार्ज-कैप शेयरों को इसका फायदा मिल सकता है।इसके उलट, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना हुआ है। कुछ शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर भी सवाल हैं। अगर कंपनियों का वास्तविक प्रदर्शन उनकी मौजूदा कीमतों के अनुरूप नहीं रहा, तो उनमें दबाव बढ़ सकता है।इसलिए केवल शुरुआती तेजी या किसी एक सकारात्मक संकेत के आधार पर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। कंपनी की कमाई, शेयर का वैल्यूएशन और बाजार की मौजूदा परिस्थितियां देखना जरूरी है।
निवेशकों की नजर अब किन बातों पर रहेगी?
फिलहाल बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक शेयर बाजारों का रुख, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे अहम भूमिका निभाएंगे। आईटी शेयरों में खरीदारी और रुपये की मजबूती राहत दे सकती है, लेकिन महंगा तेल और वैश्विक अनिश्चितता अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं।अगले सप्ताह बाजार को आईपीओ से जुड़ी नकदी और कंपनियों के नतीजों से कितना समर्थन मिलता है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल निवेशकों के लिए तेजी के संकेतों के साथ जोखिमों पर भी नजर रखना जरूरी है।