भोपाल। सरकारी स्कूलों की ढीली प्रशासनिक व्यवस्था का खामियाजा लाखों मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। आधा शैक्षणिक सत्र खत्म हो गया, बच्चे बगैर सरकारी गणवेश के ही स्कूल जा रहे हैं। स्कूलों के शिक्षकों को एसएसआर ड्यूटी में लगाने से बच्चों के बैंक खातों में सत्यापन में देरी हो रही है। इस कारण कक्षा पहली से आठवीं तक के प्रत्येक छात्र को यूनिफॉर्म के लिए 600 रुपये की राशि बैंकों में नहीं पहुंच पाई।
जानकारी के अनुसार आधा सत्र बीत जाने के बाद भी अभी तक छात्रों की प्रोफाइल और उनके बैंक खातों के सत्यापन/अपडेट करने की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो सकी है। इसका मुख्य कारण प्रदेश के 10 हजार से अधिक स्कूली शिक्षकों को बीएलओ की ड्यूटी लगाई गई है। एसएसआर में संशोधन और नए नाम जोडऩे जैसे कार्य शिक्षक कर रहे हैं। ऐसे में वे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। हालांकि स्कूलों में अतिथि शिक्षक पदस्थ है, पर उसके पास 5-5 कक्षाएं पढ़ाने का भार है। इस कारण वे सत्यापन कार्य नहीं कर पा रहे हैं।
वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला परियोजना समन्वयकों डीपीसी को जल्द से जल्द डेटा अपडेट करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। कई जिलों के डीपीसी का कहना है कि बैंक सत्यापन कार्य की रिपोर्ट जब तक स्कूल के शिक्षक नहीं भेजेंगे, तब तक वे डेटा अपडेट नहीं कर पा रहे हैं।
बता दें कि पिछले सत्र में भी इसी तरह की लेटलतीफी हुई थी। नवंबर के आखिरी सप्ताह में करीब 55 लाख बच्चों के खातों में 330 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए थे। इस साल का बजट 336 करोड़ करीब 56 लाख बच्चों को प्रति बच्चे 600 रुपए बंटनी है। ऐसे में अब बच्चों का बैंक खाता अपडेट कार्य पूरा नहीं हो सका। कोविड महामारी के बाद से कभी सीधे तैयार यूनिफॉर्म बांटने तो कभी बैंक खातों में 600 रुपये डीबीटी करने की ढुलमुल व्यवस्था से बच्चों को समय पर स्कूल ड्रेस नहीं मिल पा रहे हैं।
क्या बोले स्कूल शिक्षा मंत्री
मामले को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश के कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को स्कूल ड्रेस की राशि 336 करोड़ रुपए वितरित की जानी है। इसके लिए सभी डीईओ को बच्चों के बैंक खातों का सत्यापन कार्य जल्द पूर्ण करके भेजने के निर्देश दिए हैं। हम प्रयास करेंगे कि दीवाली से पहले बच्चों के खातों में स्कूल ड्रेस की राशि पहुंच जाएं।