एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब लड़का रहता था। उसके पिता एक किसान थे और माँ घरेलू महिला। रामू अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। वह बहुत ही मेहनती और ईमानदार था। उसके माता-पिता ने उसे हमेशा अच्छाई और सच्चाई का पाठ पढ़ाया था। एक दिन, रामू स्कूल से घर लौट रहा था, तभी उसे रास्ते में एक बटुआ पड़ा हुआ मिला। उसने बटुए को उठाया और देखा कि उसमें काफी सारे पैसे थे। रामू ने सोचा, "यह पैसे तो किसी के बहुत काम आ सकते हैं। मुझे इसे उसके मालिक तक पहुँचाना चाहिए।" उसने बटुए में रखे पते को देखा और उस दिशा में चल पड़ा। वह पता गाँव के एक धनी व्यापारी का था। रामू ने उनके घर जाकर दरवाजा खटखटाया। व्यापारी ने दरवाजा खोला और रामू को देखकर आश्चर्यचकित हुआ। रामू ने विनम्रता से बटुआ उन्हें वापस कर दिया। व्यापारी ने बटुआ खोलकर देखा और पाया कि सभी पैसे सुरक्षित थे। वह रामू की ईमानदारी से बहुत प्रभावित हुए। व्यापारी ने रामू से पूछा, "तुम्हें पता था कि इस बटुए में इतने सारे पैसे हैं, फिर भी तुमने इसे वापस कर दिया। तुमने ऐसा क्यों किया?" रामू ने जवाब दिया, "सर, मेरे माता-पिता ने मुझे सिखाया है कि ईमानदारी सबसे बड़ी दौलत है। यह पैसा मेरा नहीं है, इसलिए मैं इसे आप तक वापस लाया।" व्यापारी रामू की बात सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और उसे इनाम के रूप में कुछ पैसे दिए। उन्होंने रामू के माता-पिता से भी मुलाकात की और उनकी परवरिश की प्रशंसा की। रामू ने उन पैसों से अपनी पढ़ाई पूरी की और बड़ा होकर एक सफल व्यक्ति बना। उसने समाज में ईमानदारी और अच्छाई का महत्व समझाया और सभी को प्रेरित किया।

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