न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क: खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो ने प्रेस वार्ता की. इस दौरान सुदेश महतो ने झारखंड सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि झारखंड लंबे संघर्ष और जल, जंगल, जमीन की लड़ाई के बाद अस्तित्व में आया है. राज्य की जनता को उम्मीद थी कि यहां के प्राकृतिक संसाधन प्रदेश के विकास और लोगों के जीवन में बदलाव लाएंगे.
सुदेश महतो ने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद राज्य सरकार को सेस लगाने का अधिकार प्राप्त हुआ था, लेकिन केंद्र सरकार ने एमएमडीआर अधिनियम में संशोधन कर इस व्यवस्था को प्रभावित किया है. अब न्यायालय से मिले राज्य सरकार के अधिकार का स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि अधिनियम की धारा 9डी के तहत कुछ शर्तों के साथ विशेष अनुमति का प्रावधान है. केंद्र सरकार से मांग है कि राज्य को शर्तों के साथ सेस लगाने की अनुमति दी जाए.
उन्होंने कहा कि खनिज क्षेत्र से अर्जित राजस्व के दुरुपयोग की बातें लगातार सामने आती रही हैं. 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की खबरें प्रकाशित हुई हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के चाल, चरित्र और चेहरे से जनता अवगत है. नौकरी की बिक्री और अवैध खनन जैसे मामले भी सार्वजनिक हैं.
सुदेश महतो ने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन उपलब्ध राशि का उचित इस्तेमाल नहीं हुआ. उन्होंने दावा किया कि 2025-26 में भी बड़ी राशि खर्च नहीं हो सकी. आदिवासी कल्याण के लिए निर्धारित राशि का महज 52 प्रतिशत ही खर्च होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जब सरकार खुद उपलब्ध फंड खर्च नहीं कर पा रही है, तो फंड की कमी की दलील देना उचित नहीं है.
उन्होंने कहा कि सरकार यदि वास्तव में ईमानदार है तो अपने तथ्यों के साथ केंद्र सरकार के समक्ष पहल करे. उनकी मांग है कि डीएमएफटी के पैटर्न पर राज्य को सेस लगाने का अधिकार दिया जाए और धारा 9डी के तहत कुछ शर्तों के साथ यह रास्ता खोला जाए. सेस की राशि का इस्तेमाल केवल प्रभावित क्षेत्रों के विकास में किया जाना चाहिए.
JSSC CGL परीक्षा रद्द करने पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान सुदेश महतो ने JSSC CGL परीक्षा को रद्द किए जाने और आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने तरीके से अभ्यर्थियों की मांग मानने की कोशिश की है, लेकिन परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला न्यायिक समीक्षा में नहीं टिकेगा.
उन्होंने कहा, "परीक्षा रद्द करने का अधिकार स्वतंत्र बॉडी को है, सरकार को नहीं." सुदेश महतो ने आरोप लगाया कि सरकार ने अभ्यर्थियों के साथ छल किया है. उन्होंने कहा कि इसी सरकार की CID ने कोर्ट में जाकर कहा था कि अभ्यर्थियों को नौकरी दी जा सकती है, जबकि अब सरकार परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात कह रही है.
सुदेश महतो ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि परीक्षा और नियुक्ति से जुड़े मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच ही उचित रास्ता है.