प्रमोद शर्मा, हापुड़: शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने लंबित मामलों के निस्तारण की दिशा में बड़ी तस्वीर पेश की। जनपद में अदालतों, बैंकों, राजस्व, पुलिस और अन्य विभागों के स्तर पर कुल 2,89,956 मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 5 करोड़ 10 लाख 72 हजार 596 रुपये का सेटलमेंट हुआ। बड़ी संख्या में मामलों के निस्तारण से जहां संबंधित पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिली, वहीं न्यायालयों पर लंबित मुकदमों का बोझ भी कम हुआ।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अजय कुमार सिंह प्रथम ने दीप प्रज्ज्वलित कर और मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पार्चन एवं माल्यार्पण के साथ किया। इस दौरान न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, बैंक अधिकारी, न्यायिक कर्मचारी और वादकारी मौजूद रहे।
लोक अदालत में जनपद के विभिन्न न्यायालयों द्वारा कुल 5037 वादों का निस्तारण किया गया। इनमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ कुमार वर्मा ने अकेले 3354 लघु आपराधिक वादों का निस्तारण करते हुए 2,25,030 रुपये अर्थदंड वसूल किया। अपर जिला जज/नोडल अधिकारी अवनीश कुमार राय ने 290 मामलों का निस्तारण किया। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पीयूष पाण्डेय ने 42 वाद निपटाए। इनमें छह दंपतियों को सुखमय वैवाहिक जीवन की शुभकामनाओं के साथ न्यायालय कक्ष से विदा किया गया। वहीं 12 मामलों में वादियों को संपूर्ण भरण-पोषण की धनराशि भी दिलाई गई।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी गुरप्रीत सिंह बावा ने 26 मामलों का निस्तारण करते हुए 2 करोड़ 9 लाख 35 हजार रुपये का सेटलमेंट कराया। सिविल जज (सीडि) त्वरित न्यायालय ने 160 मामलों में 20 लाख 22 हजार 876 रुपये का सेटलमेंट कराया। अन्य न्यायालयों में भी आपराधिक, सिविल, पारिवारिक और विभिन्न अधिनियमों से जुड़े मामलों का समझौते के आधार पर निस्तारण हुआ।
बैंकों द्वारा प्री-लिटिगेशन के 167 मामलों का समझौते से निस्तारण कर 2 करोड़ 26 लाख 5 हजार रुपये का सेटलमेंट किया गया, जिसमें 75 लाख 24 हजार रुपये नकद प्राप्त हुए। इसके अलावा राजस्व, पुलिस और अन्य विभागों ने संयुक्त रूप से 2,84,752 मामलों का निस्तारण किया।
जनपद न्यायाधीश अजय कुमार सिंह प्रथम ने कहा कि लोक अदालत में होने वाले निस्तारण में दोनों पक्षकारों की जीत होती है और किसी का नुकसान नहीं होता। लोक अदालत के सफल आयोजन पर अधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंक कर्मियों, वादकारियों और कर्मचारियों का आभार जताया गया।