प्रमोद शर्मा, हापुड़: मिशन शक्ति अभियान के तहत महिला एवं बालिका सुरक्षा को लेकर पुलिस-प्रशासन की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन स्वर्ग आश्रम रोड स्थित आर्य कन्या पाठशाला के बाहर छुट्टी के समय सामने आ रही शिकायतें इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। आरोप है कि स्कूल की छुट्टी के समय कुछ युवक सड़क के आसपास जमा होकर छात्राओं पर अश्लील टिप्पणियां करते हैं और छेड़छाड़ का प्रयास करते हैं। इससे छात्राओं और उनके अभिभावकों में चिंता का माहौल है।
बताया जा रहा है कि इस मार्ग पर केवल आर्य कन्या पाठशाला ही नहीं, बल्कि आसपास के अन्य विद्यालयों की छात्राएं भी आवागमन करती हैं। ऐसे में स्कूल छुट्टी के समय सड़क पर युवकों का जमावड़ा छात्राओं की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी निगरानी नहीं की गई तो छोटी घटनाएं आगे चलकर बड़ी समस्या का रूप ले सकती हैं।
खास बात यह है कि क्षेत्र थाना हापुड़ नगर और हापुड़ देहात की सीमा के आसपास आता है। आरोप है कि छुट्टी के समय मौके पर न तो डायल-112 की नियमित मौजूदगी दिखाई देती है और न ही चौकी स्तर से पर्याप्त निगरानी रहती है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब संवेदनशील स्थानों पर स्कूल छुट्टी के समय पुलिस की मौजूदगी जरूरी है तो जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही?
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कई बार शिकायत या खबर सामने आने के बाद पुलिस सक्रिय होती है, कुछ दिनों तक निगरानी बढ़ती है, लेकिन बाद में स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। यदि ऐसा है तो यह केवल पुलिस गश्त का नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की निरंतरता का भी सवाल है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होना जरूरी
मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील विद्यालयों की सूची तैयार कर स्कूल छुट्टी के समय नियमित गश्त, सिविल ड्रेस में महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मियों की निगरानी तथा संदिग्ध युवकों की जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर सीसीटीवी और स्थानीय स्तर पर शिकायत तंत्र को भी मजबूत किया जाना चाहिए।
अब देखना यह है कि पुलिस-प्रशासन इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मौके की जांच कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करता है या फिर कार्रवाई केवल शिकायत और खबर सामने आने तक सीमित रहती है। छात्राओं की सुरक्षा किसी अभियान का आंकड़ा नहीं, बल्कि पुलिस-प्रशासन की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी है।