अभावग्रस्त बच्चें-महिलाओं का जीवन संवार रही माधुरी

 शक्ति वंदन : 13 वर्षों से गरीबों-वंचितों के बीच बस्ती पाठशाला, फैल रहा शिक्षा के साथ कौशल विकास का उजाला

शक्तिसिंह परमार

By : स्वदेश डेस्क
 शक्ति वंदन : 13 वर्षों से गरीबों-वंचितों के बीच बस्ती पाठशाला, फैल रहा शिक्षा के साथ कौशल विकास का उजाला

इंदौर।  सरकार शिक्षा का प्रकाश फैलाने के लिए अनथक प्रयास कर रही है, लेकिन अवसर और संसाधनों का अभाव अनेक बार गरीबों-वंचितों की राह में रोड़ा बनकर उन्हें शिक्षित होने से ही नहीं रोकता, बल्कि उनके समग्र विकास में भी बाधक बन जाता है। ऐसे अभावग्रस्त बच्चों-महिलाओं का जीवन संवारकर उन्हें बस्ती पाठशाला और कौशल विकास से जोड़ने के  वंदनीय कार्य का बीड़ा भी अहिल्या नगरी इंदौर में मातृशक्ति ने ही उठाया है और इन 13 वर्षों में 7 हजार से अधिक बच्चों तक पहुंचने में सफल रही हैं। 

बड़े शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत लोगों में जब यह भाव जाग्रत हो जाए कि शिक्षा का उजास प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए, क्योंकि यह उनका मौलिक अधिकार है, इसके लिए उन्हें किस तरह से अवसर और पर्याप्त संसाधन मिलेंगे, इसकी चिंता डेली कॉलेज की रसायनशास्त्र की  शिक्षिका माधुरी मोयदे दीदी ने की और उन्होंने 2013 में कुछ महिलाओं को साथ लेकर एक-दो गरीब बस्तियों का चयन कर वहां के बच्चों को बस्ती पाठशाला के द्वारा पढ़ाना शुरू किया। यह कार्य आसान नहीं था, क्योंकि इनमें से आधे बच्चे सरकारी स्कूलों में कागज पर पंजीकृत तो थे, लेकिन पढ़ने नहीं जाते थे, क्योंकि वे अपने माता-पिता का कामकाज में हाथ बटाकर आजीविका के आकर्षण में फंसे थे। फिर सबसे बड़ी चुनौती यहां पर उन कामकाजी महिलाओं की थी, जो जगह-जगह घर, ऑफिस में झाड़ू-पोछा या बर्तन का काम करती थीं। वे भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने पर ध्यान नहीं दे पाती थीं। इसके लिए माधुरी मोयदे ने सायंकाल 4 से 6 बजे के बीच बच्चों को एकत्रित कर पढ़ाना शुरू किया। 

2017 में विधिवत पंजीयन करवाया

समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की यह पहल यही नहीं रुकी, 2017 में विधिवत रूप से माधुरी मोयदे ने विजय सोशल वेलफेयर सोसायटी के रूप में पंजीयन करवाया और इसके माध्यम से वे गरीब-वंचित बच्चों एवं महिलाओं को शिक्षित करने के साथ उन्हें रोजगार हेतु कौशल विकास से भी जोड़ने में सफल हो रही हैं। इन बस्तियों में कामकाजी महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई के साथ ही पैकेजिंग कार्य का प्रशिक्षण देकर अन्य संस्थाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया गया। यहां की बालिकाओं को भी मेहंदी और ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण देेकर आत्मनिर्भर बनाया। इस कार्य में माधुरी मोयदे के साथ 100 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। प्रत्यक्ष रूप से 15 से अधिक मातृशक्ति सक्रिय रूप से कार्यरत हंै। 

 इन क्षेत्रों में बस्ती पाठशाला 

बस्ती पाठशाला में पहले बच्चों को खेल-खेल के जरिए आकर्षित किया, फिर सरकारी स्कूलों में पंजीकृत और अपंजीकृत बच्चों को कक्षा एवं पाठ्यक्रम अनुसार एवं प्राथमिक शिक्षण देना प्रारंभ किया। पहले 10, 20 से  संख्या 40 बच्चों तक पहुंची। वर्तमान में साढ़े तीन सौ से अधिक बच्चों के लिए स्लम बस्ती-गांव में बस्ती पाठशाला का संचालन होता है, जिसमें योजना क्रमांक 140, मूसाखेड़ी, पिपलियाहाना कांकड़, रणजीत हनुमान क्षेेत्र, कोदरियाखेड़ी, दूधिया, चवली समेत कुल 8 स्थानों पर सभी बस्ती पाठशालाओं में क्रमश: 55 से 60 बच्चे उपस्थित रहते हैं। यहां से अध्ययनरत विद्यार्थियों को पुन: स्कूल भेजने में सफल होने के साथ प्राथमिक रूप से शिक्षित बच्चों को विधिवत सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलवाने का कार्य भी बड़े स्तर पर इन 13 वर्षों में हुआ है। 

प्रयास का सम्मान 
यही नहीं माधुरी मोयदे ने मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता अभियान द्वारा 10 हजार से अधिक किशोरियों, महिलाओं को जोड़ा, 3 हजार से अधिक बेटियों को आत्मरक्षा का सफल प्रशिक्षण भी दिया, इसका प्रतिफल उन्हें मध्यप्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राष्ट्र माता पद्मावती सम्मान के रूप में उन्हें मिला।


मिशन शक्ति 20 बच्च्यिांं राष्ट्रपति से मिलीं 

माधुरी मोयदे के प्रयास से अंतरिक्ष विज्ञान के आउटरिच कार्यक्रम मिशन शक्ति के तहत सरकारी स्कूल की 20 छात्राओं का चयन हुआ। इन्हें ऑनलाइन प्रशिक्षण देकर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से मिलवाया गया और मिशन का उद्देश्य बताया। 108 देशों की 12 हजार से अधिक लड़कियों में से मध्यप्रदेश से विजय वेलफेयर सोसायटी की छात्राओं का चयन हुआ। इन बालिकाओं ने फिजिक्स, मैथ्स और डायनामिक का विशेष पाठ्यक्रम पढ़ा।

इसरो की प्रयोगशाला तक पहुंचे बच्चें

माधुरी मोयदे के प्रयास से कास्मिक स्टार सुपर-100 कार्यक्रम द्वारा इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर के 8 जिलों के 3500 से अधिक विद्यार्थियों ने 6-7 मई को ऑनलाइन कार्यशाला में भाग लिया। चयन प्रक्रिया में 8वीं से 11वीं तक के 120 बच्चे शामिल थे। रॉकेट साइंस विषय पर भी कार्यशाला में बच्चों का ज्ञानवर्धन हुआ। यही नहीं अहमदाबाद स्थित इसरो की फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी और स्पेस एप्लीकेशन सेंटर का शैक्षणिक भ्रमण भी करवाया। चयनित 10 विद्यार्थियों को इसरो वैज्ञानिकों से सीधे संवाद का मौका मिला।

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