रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरों को साफ रखने वाले सीवर और कचरा बीनने वाले कर्मियों के बच्चों की पढ़ाई का सहारा सरकारी फाइलों में फंस गया है। छत्तीसगढ़ में 8255 बच्चों की प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप इसलिए अटकी है कि नगरीय निकाय पात्र बच्चों की जानकारी ही नहीं भेज पाए। राज्य शहरी विकास अभिकरण यानी सूडा ने जुलाई में ब्योरा मांगा था। ढाई महीने बीत गए लेकिन जवाब नहीं आया। अब सूडा ने स्मरण पत्र जारी कर नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को सात दिन का समय दिया है।
नमस्ते योजना के तहत मिलनी है छात्रवृत्ति
मामला नमस्ते यानी नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम योजना का है। इसमें सत्यापित सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों के साथ कचरा बीनने वाले श्रमिकों के बच्चों को प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति दी जानी है। प्रदेश के इस योजना के दायरे में 1362 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारी और 6893 कचरा बीनने वाले श्रमिक आते हैं। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग ने इन कर्मियों के बच्चों को छात्रवृत्ति योजना में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
सूची तैयार फिर भी आगे नहीं बढ़ी प्रक्रिया
लोक शिक्षण संचालनालय ने पात्र बच्चों की सूची पहले ही उपलब्ध करा दी है। इसके बावजूद निकायों से जानकारी न मिलने के कारण लाभ दिलाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही। जिन परिवारों के लोग दिन रात शहर की सफाई में लगे रहते हैं। उनके बच्चों की पढ़ाई की मदद खुद सुस्ती की धूल फांक रही है। सूडा ने 24 जुलाई को पहली बार पत्र जारी कर ब्यौरा मांगा था।
चार महीने से चल रही चिट्ठियों की कहानी
इस स्कॉलरशिप का मामला कई स्तरों से गुजर चुका है। केंद्र ने 8 जून को राज्य सरकार को पत्र भेजा। 15 जून को राज्य शासन ने संबंधित विभाग के आयुक्त को लिखा। 30 जून को विभाग ने सूडा से जानकारी मांगी। 24 जुलाई को सूडा ने निकायों को पत्र जारी किया। लेकिन ब्योरा नहीं मिला। इसके बाद 8 अक्टूबर को सूडा ने दोबारा पत्र लिखकर निकायों को सात दिन में जानकारी देने के निर्देश दिए। यानी चार महीने से ज्यादा वक्त चिट्ठियों में ही गुजर गया।