उमेश सिंह,दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में समग्र आईडी धोखाधड़ी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। प्रशासनिक जांच में पता चला कि 105 बच्चों का नाम एक ही समग्र परिवार आईडी में जोड़े गए थे। इस मामले में पुलिस ने दमोह मिशन अस्पताल से जुड़े संजीव लैंबर्ट को गिरफ्तार किया है। उन्हें कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। साथ ही डॉक्यूमेंट जालसाजी, धर्म परिवर्तन के संदेह और बाल तस्करी की आशंका के आरोपों की जांच कर रही है।
शिकायत से खुला मामला
दरअसल, मामला दमोह बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक तिवारी की शिकायत से शुरू हुआ। उनका आरोप था कि संदिग्ध दस्तावेजों के सहारे बच्चों के नाम समग्र रिकॉर्ड में दर्ज किए गए। कुछ बच्चों को गोद में लिया हुआ दिखाया गया। वहीं, कुछ के नाम एक परिवार आईडी से दूसरी में ट्रांसफर किए गए।
कलेक्टर ने बनाई जांच समिति
शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने चार सदस्यीय जांच समिति बनाई है। समिति ने कई सालों की एंट्री और दस्तावेज खंगाले और गड़बड़ियाँ पाईं गईं। इसके बाद 25 सितंबर को दमोह देहात थाने में 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। आरोपियों में लैंबर्ट के अलावा रामलाल कश्यप,प्रवीण पॉल, जगदीश, पार्थ राजपूत और दिलीप के नाम हैं। बाकी पांच आरोपियों की तलाश जारी है।
जनपद पंचायत की आईडी से बदलाव का शक
जांच में सामने आय़ा कि कुछ बदलाव दमोह जनपद पंचायत के लॉगिन से किए गए। पुलिस यह पता लगा रही है कि इन बदलावों की मंजूरी किसने दी और क्या इसमें सरकारी कर्मचारी भी शामिल थे। थाना प्रभारी धर्मेंद्र उपाध्याय के अनुसार बच्चों के जैविक माता-पिता और सिस्टम में दर्ज परिवार की जानकारी में गड़बड़ियों की जांच हो रही है। जांच में यह भी पता चला कि एक बच्चे का नाम कथित तौर पर 2016 में लैम्बर्ट की पारिवारिक आईडी में जोड़ा गया था। लैम्बर्ट ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि बच्चा फिलहाल छत्तीसगढ़ में रह रहा है।
पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लैंबर्ट इससे पहले मिशन अस्पताल से जुड़े बिना वैध योग्यता के इलाज के आरोप वाले मामले में गिरफ्तार हुए थे। हालांकि बाद में जमानत पर रिहा हुए। पुलिस देख रही है कि दोनों मामलों में कोई कड़ी है या नहीं। अब बच्चों की पहचान, मौजूदा ठिकाने, इस्तेमाल हुए दस्तावेजों और बदलाव को मंजूरी देने वालों की भूमिका की पड़ताल हो रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि मामला सिर्फ फर्जी एंट्री तक सीमित था या इसमें दूसरी आपराधिक गतिविधियां भी शामिल थीं।