दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हटा की सड़कों पर मंगलवार को फूल ही फूल बिखरे थे। इन्हीं फूलों के बीच बागेश्वर धाम धीरेंद्र शास्त्री थे। सनातन हिंदू एकता रथयात्रा तीसरे दिन दमोह जिले के हटा से आगे बढ़ी। यहां शास्त्री ने छत पर खड़े लोगों से सीधा सवाल किया कि कल किसी हिंदू पर मुसीबत आई तो घर से निकलोगे या नहीं। उनका कहना था कि न निकले तो तुम सबसे बड़े बुजदिल हो। उन्होंने यह भी साफ किया कि यात्रा का मकसद राजनीति में जाना या किसी को वोट दिलवाना नहीं है।
गौरीशंकर के दर्शन के साथ बच्चों को 7 वचनों की शपथ
हटा में रवानगी से पहले शास्त्री ने भगवान गौरीशंकर के दर्शन किए। फिर सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ हुआ और राष्ट्रगान गाना गाया। इसके बाद बच्चों को सनातन धर्म, हिंदू एकता और सामाजिक समरसता से जुड़े सात वचनों की शपथ दिलाई गई। मंगलवार की यात्रा में अयोध्या की हनुमानगढ़ी से राजू दास महाराज, मलूकपीठ के गंगा दास महाराज, हरिद्वार को मौनी महाराज और चित्रकूट धाम के राधेश्याम महाराज भी साथ रहे।
शास्त्री पर फूलों की बारिश
बागेश्वर बाबा के स्वागत में कोई कसर नहीं दिखी। स्कूली छात्राएं कलश लेकर कतार में खड़ी रहीं। ग्रामीणों ने फूलों की रंगोली बनाई और ढोल नगाड़े बजवाए। साथ ही जेसीबी से भी फूल बरसाए गए। तेज धूप में सेवादार शास्त्री के ऊपर छाता ताने साथ चलते रहे।
पहले दिन से अब तक कैसा रहा यात्रा का रंग
यात्रा के पहले दिन शास्त्री ने कहा था कि चाहे जितने विरोधी आएं और प्राणो चले जाएं, धर्म नहीं छोड़ना है। उन्होंने सनातनियों की एकता से भारत के मजबूत होने की बात कही। यात्रा में श्रद्धालुओं ने जात-पात की विदाई और सब हिंदू भाई के नारे लगाए। कुछ युवकों ने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि अब बागेश्वर धाम आकर यात्रा रोककर दिखाएं। बिहार से आए संत ऋषि ने पन्ना में मिले सहयोग और उत्साह की तारीफ की और लोगों से गुरुदेव के साथ जुड़े रहने की अपील की।
बता दें कि शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथयात्रा 3.0 रविवार सुबह करीब 11:30 बजे बागेश्वर धाम से शुरू हुई थी। पांच दिन की यह यात्रा करीब 500 किमी का सफर तय कर पांच जिलों से गुजरेगी। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य सनातन एकता, सामाजिक समरसता, नशामुक्ति और लव जिहाद से मुक्त बुंदेलखंड बनाना है। सोमवार को पन्ना में रात्रि विश्राम के बाद यात्रा हटा के लिए रवाना हुई थी।
श्रद्धालुओं की जुबानी
इंदौर से बागेश्वर धाम की एक श्रद्धालु का कहना है कि हिंदू राष्ट्र सिर्फ कागजों पर नहीं, लोगों के आचरण और विचारों में दिखना चाहिए। यहां सबको बराबर हक और सम्मान मिले। कानपुर के मातृशक्ति सुंदरकांड मंडल की संध्या सिंह साथियों के साथ पैदल चल रही हैं। उनके अनुसार, हिंदू राष्ट्र बनाना सिर्फ गुरुजी की नहीं, उनकी अपनी भी जिम्मेदारी है।