Balrampur Ultrasound Centers

Balrampur Ultrasound Centers: बलरामपुर में फल-फूल रहे फर्जी अल्ट्रासाउंड सेंटर, डीएम के आदेशों को दिखा रहे ठेंगा

जिले में स्वास्थ्य महकमे की कथित मिलीभगत और लापरवाही के चलते मरीजों की जिंदगी के साथ खुलेआम गोरखधंधा चल रहा है।

By : विकास जैन
Balrampur Ultrasound Centers: बलरामपुर में फल-फूल रहे फर्जी अल्ट्रासाउंड सेंटर, डीएम के आदेशों को दिखा रहे ठेंगा

Balrampur Ultrasound Centers: बलरामपुर में फल-फूल रहे फर्जी अल्ट्रासाउंड सेंटर, डीएम के आदेशों को दिखा रहे ठेंगा

Balrampur Ultrasound Centers: जिले में स्वास्थ्य महकमे की कथित मिलीभगत और लापरवाही के चलते मरीजों की जिंदगी के साथ खुलेआम गोरखधंधा चल रहा है। इस जानलेवा खेल का पर्याय, नगर पालिका परिषद कार्यालय के पास  संचालित 'सेवा डायग्नोसिस एंड अल्ट्रासाउंड सेंटर' (न्यू सेवा डायग्नोस्टिक) बन चुका है। जिलाधिकारी (डीएम) के उन सख्त आदेशों की यहां सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिनमें स्पष्ट है कि बिना विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट के कोई भी सेंटर नहीं चल सकता। डीएम डॉ विपिन कुमार जैन के निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए यह सेंटर न केवल बिना योग्य डॉक्टर के संचालित हो रहा है, बल्कि मरीजों को फर्जी और गलत रिपोर्ट थमाकर उनकी जान को सीधे तौर पर जोखिम में डाल रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हैं और कार्रवाई के नाम पर केवल 'खानापूर्ति' कर रहे हैं।

​जांच कहीं और, रिपोर्ट कहीं और की

इस सेंटर की कार्यप्रणाली पर तब गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब एक महिला मरीज को अल्ट्रासाउंड के नाम पर पूरी तरह से गलत रिपोर्ट थमा दी गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों में इस बात का स्पष्ट खुलासा हुआ है कि इस सेंटर में जांच के नाम पर क्या खेल चल रहा है। 

जानकारी के अनुसार, महिला की जांच कहीं और से दिखाई गई और रिपोर्ट में ऐसी समस्या निकाल दी गई जिसकी कोई उम्मीद ही नहीं थी। इस गंभीर फर्जीवाड़े की शिकायत जिलाधिकारी बलरामपुर से की गई है, लेकिन सेंटर का संचालन अब भी बेखौफ जारी है। बताया जाता है संचालक ने कुछ दिनों के लिए बंद किया गया था। लेकिन, आज सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सोमवार को खुला मिला और सेंटर पर तैनात एक कर्मचारी ने अल्ट्रासाउंड करने की बात की पुष्टि की है।

​अधिकारियों का रटा-रटाया बहाना

जब इस गंभीर मामले की तह तक जाने के लिए हमारे संवाददाता ने नोडल अधिकारी (एसीएमओ) बृजेश प्रताप सिंह और अन्य संबंधित अधिकारियों से 'सेवा डायग्नोसिस एंड अल्ट्रासाउंड सेंटर' के विषय में जवाब मांगा, तो उनकी ओर से लीपापोती वाला बयान सामने आया। ​एसीएमओ ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा, "हम लोगों ने कई दिन पहले यहां पर छापा मारने के लिए गए थे, लेकिन यह सेंटर तब बंद मिला था। इसके बाद से हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि इस पर कार्रवाई की जाए, हम जल्द से जल्द जांच करके अल्ट्रासाउंड सेंटर पर अगर किसी तरह की अनियमितता मिलती है तो कार्रवाई करेंगे।" 

​जिले में फर्जी सेंटरों का मकड़जाल

'सेवा डायग्नोस्टिक' तो महज एक बानगी है। हकीकत यह है कि बलरामपुर में लगभग 50 अल्ट्रासाउंड सेंटर और लगभग 100 डायग्नोसिस व पैथोलॉजी लैब निजी मालिकों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पूरे जिले में केवल एक-तीन प्राइवेट संस्थानों को छोड़कर किसी के पास प्रशिक्षित व विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं।

​न वैध कागजात, न पीसी-पीएनडीटी रजिस्ट्रेशन

धड़ल्ले से चल रहे इन 40 से अधिक फर्जी अल्ट्रासाउंड सेंटरों के पास न तो पीसी-पीएनडीटी का वैध रजिस्ट्रेशन नंबर है और न ही संचालन के मानक पूरे करने वाले कागजात। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहे इस मौत के व्यापार पर महीनों पहले दिए गए आदेशों के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

​जिम्मेदारी किसकी, डीएम या सीएमओ?

इस पूरी स्थिति ने एक बेहद खौफनाक और वाजिब सवाल खड़ा कर दिया है। यदि 'सेवा डायग्नोस्टिक सेंटर' जैसे अवैध संस्थानों की गलत अल्ट्रासाउंड या पैथोलॉजी रिपोर्ट के आधार पर किसी मरीज का गलत इलाज कर दिया जाता है और उसकी तबीयत बिगड़ जाती है या जान चली जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या जिले के जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन संभावित घटनाओं की जिम्मेदारी अपने सिर लेंगे? प्रशासन का यह मौन और स्वास्थ्य विभाग की यह हीलाहवाली बलरामपुर के आम जनमानस के लिए जानलेवा साबित हो रही है। 

सरकार कर रही है इंतज़ाम, फिर भी प्रशासन नाकाम

जबकि सरकार सरकारी अस्पतालों में लगातार अल्ट्रासाउंड सेंटर खोलने और उन्हें सुदृढ़ करने की बात कर रही है। जिले के कई 'फर्स्ट रेफरल सेंटर' व जिला स्तरीय अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड केंद्र और पैथोलॉजी लैब को आधुनिक व सुदृढ बनाने की योजना शुरू है और कई जगहों पर मशीन इत्यादि आकर भी रखी जा चुकी हैं। लेकिन, वहां पर मरीज को ना तो समुचित जांच मिल पाती है। ना ही उनका चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की कमी के कारण अल्ट्रासाउंड ही हो पता है।

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