योगेंद्र त्रिपाठी, बलरामपुर: सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का भुगतान कराकर कागजों में गोदाम भरने और धरातल पर उसे चट कर जाने का एक संगठित खेल तुलसीपुर क्षेत्र में बेनकाब हुआ है। प्रादेशिक को-ऑपरेटिव फेडरेशन (पीसीएफ) के दो क्रय केंद्रों पर भौतिक सत्यापन के दौरान 228.764 मीट्रिक टन गेहूं का स्टॉक पूरी तरह नदारद पाया गया, जिसके बाद करीब 60 लाख रुपये के सुनियोजित गबन का सनसनीखेज खुलासा हुआ। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पीसीएफ के जिला प्रबंधक अश्वनी शुक्ला ने तुलसीपुर थाने में लिखित तहरीर दी, जिसके आधार पर प्रभारी सचिव प्रकाश सिंह और केंद्र प्रभारी महेंद्र मणि तिवारी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कराया गया है।
यह फर्जीवाड़ा 11 सितंबर 2026 को उस वक्त उजागर हुआ जब जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी गोविंद कुमार उपाध्याय, सहायक आयुक्त सहकारिता अजय कुमार मौर्य तथा अपर जिला सहकारी अधिकारी देवेंद्र प्रताप अग्रहरि की संयुक्त टीम ने बी-पैक्स तुलसीपुर के नचौरा-नचौरा और कौवापुर गेहूं क्रय केंद्रों पर औचक छापा मारा। स्थलीय जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि नचौरा केंद्र पर वर्ष 2026-27 के दौरान कुल 420.87 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद दर्ज थी, जिसमें से 353.759 मीट्रिक टन अनाज भारतीय खाद्य निगम को सम्प्रदान किया गया था। रिकॉर्ड के अनुसार शेष 67.111 मीट्रिक टन गेहूं गोदाम में मौजूद होना चाहिए था, किंतु जांच टीम को गोदाम की चाबी तक मुहैया नहीं कराई गई और खिड़कियों से देखने पर समूचा गोदाम खाली मिला।
ठीक इसी प्रकार कौवापुर केंद्र के अभिलेखों में 322.600 मीट्रिक टन खरीद के सापेक्ष महज 160.947 मीट्रिक टन गेहूं ही एफसीआई को भेजा गया था। यहां के गोदाम में शेष 161.653 मीट्रिक टन गेहूं का सुरक्षित भंडारण होना चाहिए था, लेकिन मौके पर अनाज का भौतिक स्टॉक शून्य दर्ज किया गया। न्यूनतम समर्थन मूल्य 2605 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दोनों केंद्रों पर कुल मिलाकर 59 लाख 59 हजार 302 रुपये 20 पैसे के सरकारी धन का हेरफेर आंका गया है।
जांच टीम ने तत्काल प्रभाव से दोनों गोदामों को सील कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी। पीसीएफ जिला प्रबंधक की तहरीर के बाद पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।