बलरामपुर। सरकारी अस्पतालों में समय से ड्यूटी पर न पहुंचने और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने अब पूरी तरह से कमर कस ली है। बुधवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बलरामपुर का औचक निरीक्षण करने पहुंचे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी को उस समय बड़े पैमाने पर अव्यवस्था देखने को मिली, जब अस्पताल के कई महत्वपूर्ण पटल खाली पड़े थे।
निरीक्षण के दौरान नदारद मिले स्वास्थ्यकर्मी
निरीक्षण के दौरान दो महिला चिकित्सकों समेत कुल 15 स्वास्थ्यकर्मी बिना किसी पूर्व सूचना या प्रशासनिक अनुमति के अपनी ड्यूटी से नदारद पाए गए। ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को ढर्रे पर लाने के उद्देश्य से किए गए इस औचक निरीक्षण में इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के गायब मिलने पर सीएमओ ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ और इस गंभीर लापरवाही को अनुशासनहीनता का चरम मानते हुए सभी गैरहाजिर अधिकारियों व कर्मचारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने का लिखित आदेश जारी कर दिया है।
की उपस्थिति पंजिका की जांच
अस्पताल परिसर में कदम रखते ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सबसे पहले उपस्थिति पंजिका को अपने कब्जे में लेकर उसकी गहन जांच की। इस स्क्रूटनी के दौरान अस्पताल की दोनों मुख्य महिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. नमिता और डॉ. रेनू गायब मिलीं, जिससे महिला विंग की ओपीडी पूरी तरह ठप थी। इसके अलावा जीवन रक्षक दवाओं के वितरण की जिम्मेदारी संभालने वाले फार्मासिस्ट सुनील कुमार गुप्ता, वार्डों में तैनात स्टाफ नर्स निधि पांडेय व गीता यादव, मरीजों की जांच करने वाले लैब टेक्नीशियन संजय गिरी, एलएचबी पुष्पलता श्रीवास्तव, एनएमएस बृजेश सिंह तथा पीएमडब्ल्यू शैलेन्द्र तिवारी भी मौके पर मौजूद नहीं थे।
सीएमओ ने रोका वेतन
इतना ही नहीं, अस्पताल की बुनियादी व्यवस्था संभालने वाले चतुर्थ श्रेणी और सपोर्टिंग स्टाफ पर भी लापरवाही का रंग चढ़ा हुआ था, जिसमें रूपाली, स्वतंत्र कुमार, देवेश श्रीवास्तव, अवनीश तिवारी और वार्ड आया ललिता जायसवाल व सोनी देवी अपनी ड्यूटी से लापता पाई गईं।संस्थान में फैली इस घोर मनमानी और कार्यसंस्कृति की बदहाली पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. जावेद अख्तर को तलब किया। उन्होंने प्रभारी को सख्त लहजे में निर्देशित किया कि वे इन सभी 15 अनुपस्थित कर्मचारियों की गैरहाजिरी दर्ज कर उनका वेतन रोकें और तीन कार्यदिवस के भीतर स्पष्टीकरण मांगते हुए जवाब-तलब करें।
सीएमओं की चेतावनी
सीएमओ ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर हीलाहवाली या शिथिलता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि तय समय के भीतर इन कर्मचारियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो इनके खिलाफ विभागीय नियमों के तहत निलंबन की संस्तुति की जाएगी। इसके उपरांत उन्होंने दवा स्टॉक, इमरजेंसी वार्ड की तैयारियों और अस्पताल के अभिलेखों की बारीकी से जांच की तथा मातहतों को हिदायत दी कि सुदूर क्षेत्रों से आने वाले असहाय मरीजों के साथ शालीन व्यवहार कर उन्हें उच्च स्तरीय चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए।