बलरामपुर। ऑनलाइन दाखिल-खारिज और धारा 34 की नई व्यवस्था को लेकर अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच तकरार गहरा गई है। गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे वकीलों की जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन से मुलाकात नहीं हो सकी। वकीलों का आरोप है कि उन्हें देखकर जिलाधिकारी कार्यालय के पिछले दरवाजे से निकल गए। इस घटना से आक्रोशित वकीलों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर नारेबाजी की। इसके बाद संघ भवन में आयोजित बैठक में डीएम के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को भेजने तथा राजस्व न्यायालयों के बहिष्कार का निर्णय लिया गया।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मुर्तजा हुसैन खान, कलेक्ट्रेट बार के कमलेश्वर सिंह और युवा बार के मृगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि उतरौला और तुलसीपुर में चल रहे विरोध के समर्थन में मुख्यालय पर भी कामकाज ठप किया गया था। बैठक में संगठन विरोधी आचरण के आरोप में वकील आशुतोष ओझा और आशीष सिंह को पांच साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। महामंत्री संजय तिवारी और अशोक मिश्रा के अनुसार शुक्रवार, 16 अक्टूबर को भी न्यायिक कार्य स्थगित रहेगा और आमसभा में आगे की रणनीति तय होगी।
दूसरी तरफ जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि वकीलों के आगमन की कोई पूर्व सूचना नहीं थी। वह दोपहर 12 बजे से समेकित दिव्यांग विद्यालय में प्रतीक्षारत बच्चों के तय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकले थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्ञापन लेने से इनकार जैसी कोई बात नहीं थी और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। प्रशासन अधिवक्ताओं का सम्मान करता है और संवाद के लिए तैयार है।