संतोष कुमार यादव, सुलतानपुर: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में सरकारी दवाओं का कूड़ेदान में मिलना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर गया है। अस्पताल परिसर में उपयोग योग्य दवाओं के फेंके जाने की सूचना फैलते ही लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने इसे सरकारी संसाधनों की खुली बर्बादी बताते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
कूड़ेदान में मिली दवाएं
मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को अस्पताल परिसर के कूड़ेदान में परिवार नियोजन कार्यक्रम में उपयोग होने वाली माला-एन और छाया समेत कई सरकारी दवाएं बड़ी मात्रा में पड़ी मिलीं। मौके पर मौजूद लोगों का दावा है कि अधिकांश दवाओं की समाप्ति तिथि वर्ष 2027 और 2028 तक थी, यानी वे पूरी तरह उपयोग योग्य थीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर मरीजों तक पहुंचने वाली दवाएं कूड़ेदान तक कैसे पहुंच गईं।
लोगों बोले... मरीजों के साथ खिलवाड़
स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्सर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध न होने का हवाला देकर निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की सलाह दी जाती है। ऐसे में सरकारी दवाओं का इस तरह फेंका जाना न केवल लापरवाही है, बल्कि गरीब मरीजों के अधिकारों के साथ भी खिलवाड़ है।
क्या बोले सीएसी अधीक्षक?
मामले की जानकारी मिलने पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. आर.सी. यादव ने मौके का निरीक्षण किया। उनका कहना है कि संभव है सफाईकर्मियों से भूलवश दवाएं कूड़ेदान में चली गई हों। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि इतनी मात्रा में दवाएं अस्पताल के स्टोर से बाहर कैसे निकलीं और इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार कौन है।
दवाएं कूड़ेदान तक कैसे पहुंचीं?
जानकारों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में औषधि भंडार से कोई भी दवा बिना विधिवत प्रविष्टि के बाहर नहीं निकाली जा सकती। प्रत्येक दवा का स्टॉक, निर्गमन और वितरण रजिस्टर में दर्ज होता है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि स्टॉक रजिस्टर का नियमित मिलान होता है तो उपयोग योग्य दवाएं कूड़ेदान तक कैसे पहुंचीं? और यदि मिलान नहीं होता, तो यह प्रशासनिक निगरानी की गंभीर चूक का संकेत है। घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा है कि यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच कर स्टॉक रजिस्टर, वितरण अभिलेख और दवाओं के निर्गमन का मिलान कराया जाए तो पूरे प्रकरण की वास्तविकता सामने आ सकती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी दवाओं की बर्बादी पर रोक लग सके।