इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में यूपीआई सरचार्ज के खिलाफ व्यापारियों की नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है। अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की बैठक में अलग-अलग व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी जुटे और फैसला लिया कि दुकानों से यूपीआई आईडी और QR कोड हटाए जाएंगे। बैठक में व्यापारियों ने UPI सरचार्ज को नकारने और UPI सरचार्ज बर्दाश्त नहीं करने के नारे भी लगाए।
नगद लेनदेन को प्राथमिकता देने का ऐलान
व्यापारियों का कहना है कि जब तक सरकार मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर से जुड़ा प्रस्तावित शुल्कर वापस नहीं लेती, वे डिजिटल भुगतान की सुविधा बंद रखेंगे। इस दौरान ग्राहकों से नकद लेनदेन को ही प्राथमिकता दी जाएग। शुक्रवार को चैंबर अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी संगठनों ने शुल्क वापस लेने की मांग का समर्थन किया।
कारोबारियों की दलील, दुकादारों में पहले से दबाव
प्रतिनिधियों के तर्क है कि महंगाई,बढ़ती परिचालन लागत और कम मुनाफे से दुकानदार पहले ही जूझ रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क कारोबार की लागत और बढ़ा देगा। उनका अनुसार, छोटे और मध्यम व्यापारियों के मुनाफे पर इसका सीधा असर पड़ेगा। कारोबारियों ने यह भी साफ किया कि वे किसी दूसरी संस्था की आर्थिक दिक्कतों का बोझ अपने सिर नहीं लेना चाहते और बैंकों को सहारा देने के लिए व्यापारियों पर भार डालना ठीक नहीं है।
सरकार के नहीं शुल्क के खिलाफ आवाज है
चैंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारी हमेशा सरकार के साथ खड़े रहे हैं। यह विरोध नीतियों का नहीं बल्कि गैरजरूरी शुल्क का है। व्यापारियों का कहना है कि अगर यही रकमद देश के विकास डिजिटल भुगतान का ढांचा मजबूत करने में लगती तो वे सहयोग पर विचार कर सकते थे।
पांच दिन चलेगा जनसंपर्क अभियान
चैंबर के संयुक्त सचिव और इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि 23 सितंबर को नो यूपीआई डे मनाकर व्यापारियों ने विरोध का संदेश दिया था। अब आंदोलने के अगले चरण में पदाधिकारी पांच दिन तक शहर के अलग-अलग बाजारों में जाएंगे। वे दुकानदारों और संगठनों से बात करेंगे। प्रस्तावित शुल्क का असर समझाएंगे। साथ ही सामूहिक फैसले के समर्थन में सबको जोड़ेंगे। आगे की रणनीति बाजारों से मिलने वाले समर्थन और सरकार के रुख पर टिकी है।