ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान एवं लोकप्रशासन अध्ययनशाला में व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत शनिवार को पहला व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें प्रधानमंत्री शासकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय, बैतूल के प्रो. धर्मेंद्र कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने के दृष्टिकोण विषय पर विचार व्यक्त किए।
प्रोफेसर ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को लंबे समय तक पश्चिमी दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया गया, जिसके कारण स्वदेशी ज्ञान परंपराओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिल सका।
औपनिवेशिक काल के संदर्भ में अध्ययन की प्रवृत्तियां
प्रो. धर्मेंद्र कुमार ने प्राचीन, औपनिवेशिक और उत्तर-औपनिवेशिक काल के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन की प्रवृत्तियों पर प्रकाश डाला। इसके परिणामस्वरूप भारतीय ज्ञान परंपराओं को कई बार अवैज्ञानिक, अंधविश्वासपूर्ण अथवा केवल सांस्कृतिक विषयों तक सीमित मानकर देखा गया।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
व्याख्यान की अध्यक्षता प्रो. डी.के. सिंह ने की। आभार अध्ययनशाला की विभागाध्यक्ष डॉ. स्वर्णा परमार ने व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. एस.के. सिंह, प्रो. संजय सिंह, प्रो. रविरंजन, प्रो. विभा दूरबार सहित अन्य शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।