इंदौरः मन की इच्छाशक्ति और लक्ष्य प्राप्ति का संकल्प जब 1 +1 होकर 11 की टीम की भांति परिश्रम की पराकाष्ठा को पार करते हैं तो सफलता की उड़ान भरने की आसमानी कल्पनाएं भी धरातल पर साकार होती नजर आती हैं। फिर आत्मनिर्भर बनकर स्वावलंबन का पाठ पढ़ाने के लिए भले ही कोरोनाकाल की आपदा सामने क्यों न खड़ी हो? मातृशक्ति के सामर्थ्य के आगे तो हर विपदाएं नतमस्तक होती हैं। अहिल्या नगरी इंदौर में 'कल्पना रमनÓ ने स्वावलंबन की कल्पना को मूर्तरूप देकर प्रेरणादायी संकल्प पूर्ण कर दिखाया है।
देवी आराधना के महापर्व 'नवरात्रÓ में अहिल्या नगरी इंदौर की ऐसी स्वावलंबी मातृशक्ति की चर्चा हो रही है, जिन्होंने जीवन की शुरुआत से संघर्षों का सामना किया, लेकिन अपने हौसले और कुछ कर गुजरने की ललक ने उन्हें सदैव प्रेरित किया। इंदौर में आर.के. अन्नपूर्णा इंडस्ट्रीज 'रमनश्रीÓ की सीईओ कल्पना रमन आज 50 से अधिक प्रकार के नमकीन, मिक्चर और चिप्स के इंदौरी स्वाद को मध्यप्रदेश, अहमदाबाद, हैदराबाद से लेकर दुबई-अमेरिका तक विस्तार देकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी गढ़ रही हैं। सिंगल पेरेटिंग के बावजूद कल्पना रमन ने नमकीन उद्योग में महिला उद्यमी के रूप में अनोखी मिसाल पेश की है, क्योंकि इस कारोबार का संचालन करने वाली वे इंदौर की पहली महिला उद्यमी हैं।
रह-रहकर संकट और संघर्ष- रमनश्री की सीईओ कल्पना रमन के जन्म के 8 वर्ष में सिर से पिता का साया उठ गया। उन्होंने मैकेनिकल में इंजीनियरिंग कर 20 वर्ष तक कार्पोरेट क्षेत्र में आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक, मंत्रम टेक्नोफेब, महिन्द्रा फूड इंडस्ट्रीज और अन्य संस्थानों में एचआर, ऑपरेशन हेड, प्रोडक्शन हेड के रूप में कार्य किया। 2014 में विवाह के बाद पारिवारिक उलझनें भी आईं, लेकिन उन्होंने आत्मनिर्भरता के लिए संघर्ष की राह नहीं छोड़ी। कोरोनाकाल ने उन्हें आपदा अवसर के लिए प्रेरित किया और महज 2 लाख रुपए से कम राशि में घर से ही नमकीन बनाकर घर-घर पहुंचाना शुरू किया। कारोबार के शुरुआती तीसरे माह में मां भी कल्पनाजी का साथ छोड़ स्वर्ग सिधार गईं, लेकिन संघर्ष में भी सफलता के फूल खिलते हैं, इसका उदाहरण उन्होंने 2 लाख से शुरू हुए नमकीन उद्यम को 65 लाख से अधिक के वार्षिक कारोबार पर खड़ा करके दिया। मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री एवं दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र समेत विभिन्न मंचों से कल्पनाजी के उद्यम प्रयास सम्मान प्राप्त कर चुके हैं।
स्वाद ने मातृशक्ति को मातृशक्ति से ऐसे जोड़ा
कल्पना रमन ने स्वयं स्वावलंबी बनकर जरूरतमंद उन महिलाओं को अपने साथ जोड़ा, जो स्वयं आत्मनिर्भर बनने के लिए परिश्रम को तैयार थीं। आज रमनश्री की इंदौर के क्लर्क कॉलोनी, रामबाग में दो यूनिट हैं, जबकि भानगढ़ में उनकी नमकीन फैक्ट्री भी शुरू हो चुकी है। इन तीनों यूनिट में कुल 15 से अधिक मातृशक्ति उत्पाद बनाने, पैकेजिंग, आपूर्ति, मार्केटिंग का कार्य देख रही हैं। विभिन्न उद्यम मंचों से कल्पनाजी के प्रयास को सराहना मिली और उन्हें विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया गया। कल्पनाजी का नमकीन व्यवसाय आगामी वर्ष में 1 करोड़ के वार्षिक लक्ष्य को पूर्ण करने की तरफ बढ़ने का विश्वास लेकर आगे बढ़ रहा है।
टेलर मेड की तरफ बढ़ता नमकीन उद्यम
कल्पना रमन ने उच्च गुणवत्ता के उत्पाद बनाकर स्थानीय लोगों और उनके परिजनों, रिश्तेदारों जो कि देश-विदेश में निवासरत हैं, वहां तक अपने उत्पाद की पहुंच बनाई। अब उन्हें अलग-अलग स्थानों से नमकीन की स्वाद गुणवत्ता अनुसार डिमांड भी आती है। इंदौर में नमकीन उद्योग नई-नई वैरायटियां बनाते हैं। कल्पनाजी का मानना है कि आने वाले दिनों में टेलर मेड यानी आपको किस तेल में, कितनी कैलोरी और कितने कार्बोहाईड्रेट का नमकीन चाहिए, यह सब मांग के आधार पर बनेगा, आपूर्ति होगी, क्योंकि इंदौर में 20 प्रतिशत की दर से प्रतिवर्ष नमकीन का उत्पादन बढ़ रहा है।
विचार, इच्छा, प्रयास हैं सफलता केे मंत्र
कल्पना रमन का स्वयं को आत्मनिर्भर बनाकर उद्यम शुरू करने का मूल उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनके लिए रोजगार के अवसर प्रदान करना है। इसके लिए वे अपने नमकीन व्यवसाय को बढ़ाकर अब एमपीआईडी के साथ लैंड और अन्य संसाधनों के लिए भी निरंतर प्रयास कर रही हैं। 10 वर्षीय बेटे के साथ वे पेशेवर व पारिवारिक संतुलन को भी बनाए रखने में सफल हो रही हैं। उनके उत्पाद के लिए शुरुआती दो वर्ष माउथ पब्लिसिटी महत्वपूर्ण रहे, क्योंकि शुरुआत में हमारा नमकीन स्टार्टअप छोटा था, लेकिन दिल से बनाती थीं, दिल से खिलाती थीं तो लोगों को उत्पाद व स्वाद पसंद आया। उद्यम में ध्यान रखें आपके विचार, इच्छा और संयुक्त प्रयास आपको सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं।
