MP Rajya Sabha By-Election: मध्य प्रदेश से राज्यसभा की खाली हुई सीट के उपचुनाव में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अलावा एक बेहद दिलचस्प नाम की चर्चा तेज हो गई है। तेलंगाना के हैदराबाद के रहने वाले कांते सयन्ना, जो अब तक 50 से अधिक चुनाव लड़ चुके हैं, ने भोपाल पहुंचकर विधानसभा से नामांकन फॉर्म लिया है और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव में खड़ा होना चाहता है।
लड़ चुके हैं 50+ चुनाव
कांते सयन्ना की पहचान चुनाव लड़ने के जुनून और अनोखे रिकॉर्ड के लिए जानी जाती है। सयन्ना ने अपने एक बयान में कहा है कि वे अब तक 5 बार लोकसभा, 8 बार विधानसभा और 6 बार विधान परिषद का चुनाव लड़ चुके हैं। इसके अलावा वे 10 से 12 बार राज्यसभा और उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। सयन्ना किसी एक राजनीतिक दल से नहीं बंधे हैं और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपने हर चुनाव का पूरा खर्च खुद ही वहन करते हैं। उन्होंने दावा किया कि 2018 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में वे तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और वंटेरू प्रताप रेड्डी के बाद तीसरे स्थान पर रहे थे।
प्रस्तावक जुटाना बना चुनौती
हालांकि, सयन्ना के सामने सबसे बड़ी अड़चन राज्यसभा चुनाव की कानूनी प्रक्रिया और नियमों की है। राज्यसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल करने के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा के 10 विधायकों के प्रस्तावक अनिवार्य हैं। सयन्ना का कहना है कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज व शपथ-पत्र लेकर भोपाल आए हैं, लेकिन विधायक उनके पर्चे पर हस्ताक्षर करने से कतरा रहे हैं। फिर भी वे सोमवार तक आवश्यक हस्ताक्षर जुटाकर नामांकन की प्रक्रिया पूरी करने की उम्मीद जता रहे हैं।
तेलंगाना में निरस्त हुआ था पर्चा
ऐसा पहली बार नही है जब कांते सयन्ना इस स्थिति का सामना कर रहे हैं। इसी साल मार्च में तेलंगाना की दो राज्यसभा सीटों के चुनाव के दौरान भी सयन्ना ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरा था, लेकिन उस समय भी 10 विधायकों के प्रस्तावक का समर्थन न होने के कारण जांच के दौरान उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया था। ऐसे में मध्य प्रदेश में भी उनके सामने यही पुरानी चुनौती आ खड़ी हुई है।