उज्जैन में आयोजित नगर पूजा

बाबा महाकाल की नगरी में नगर पूजा: 40 मंदिरों में चढ़ेगा मदिरा का भोग

उज्जैन में महाअष्टमी के अवसर पर 40 मंदिरों में नगर पूजा आयोजित की गई, जिसमें मदिरा और पूजन सामग्री अर्पित की गई। यह यात्रा शहर की प्राचीन परंपराओं को दर्शाती है।

By : नरेंद्र कुमार
बाबा महाकाल की नगरी में नगर पूजा: 40 मंदिरों में चढ़ेगा मदिरा का भोग

उज्जैन में महाअष्टमी पर चौबीस खंबा माता मंदिर से निकलेगा शासकीय दल, 26 किलोमीटर की यात्रा के बाद रात में हांडी फोड़कर होगा समापन।

उज्जैन में महाअष्टमी के अवसर पर सदियों पुरानी नगर पूजा की परंपरा निभाई जा रही है। सोमवार सुबह चौबीस खंबा माता मंदिर में महामाया और महालया माता की पूजा-अर्चना के साथ अनुष्ठान शुरू हुआ। इसके बाद शासकीय नगर पूजा दल ढोल-नगाड़ों के साथ शहर के अलग-अलग मंदिरों के लिए रवाना हुआ।इस परंपरागत यात्रा में मिट्टी की हांडी से मदिरा की धार अर्पित करते हुए करीब 40 देवी, भैरव और हनुमान मंदिरों में पूजन किया जाता है। लगभग 26 किलोमीटर के इस मार्ग पर कई प्रमुख धार्मिक स्थल आते हैं। परंपरा के मुताबिक, यात्रा का समापन रात करीब 8 बजे अंकपात क्षेत्र स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर में हांडी फोड़ने के साथ होगा।

चौबीस खंबा मंदिर से शुरू हुई नगर पूजा

महाअष्टमी पर होने वाली नगर पूजा को उज्जैन की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में गिना जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर जिला प्रशासन की ओर से इसका आयोजन कराया जाता है। इस पूजा का तांत्रिक स्वरूप भी माना जाता है।सुबह चौबीस खंबा माता मंदिर में कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने महामाया और महालया माता की पूजा-अर्चना की। इस दौरान माता को मदिरा अर्पित की गई। सोलह शृंगार की सामग्री, चुनरी और बलबाकल भी भोग के रूप में चढ़ाए गए।अनुष्ठान के बाद शासकीय दल निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ा। यात्रा के दौरान देवी और भैरव मंदिरों में मदिरा का भोग लगाने की परंपरा है, जबकि हनुमान मंदिरों में ध्वजा अर्पित की जाती है। हर पड़ाव पर पूजन और आरती के बाद दल अगले मंदिर की ओर रवाना होता है।

26 किलोमीटर के रास्ते में करीब 40 मंदिर

नगर पूजा का मार्ग शहर के कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों से होकर गुजरता है। इनमें चामुंडा माता, भूखी माता, काल भैरव और चंड-मुंड नाशिनी सहित करीब 40 मंदिर शामिल हैं। यात्रा सुबह शुरू होकर शाम और रात तक चलती है।रास्ते में कई जगह स्थानीय लोग पूजा दल का स्वागत करते हैं। धार्मिक अनुष्ठान के साथ यह यात्रा शहर की पुरानी परंपराओं और स्थानीय आस्था से भी जुड़ी हुई है।निर्धारित मार्ग पर पूजन पूरा करने के बाद दल गढ़कालिका माता मंदिर पहुंचता है। यहां पूजा के बाद समीप स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर में परंपरा का अंतिम अनुष्ठान किया जाता है। हांडी फोड़ने के साथ नगर पूजा की यात्रा पूरी होती है।

प्रशासन जुटाता है मदिरा और पूजन सामग्री

नगर पूजा के आयोजन में जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की अहम भूमिका रहती है। मदिरा से लेकर दूसरी पूजन सामग्री तक की व्यवस्था प्रशासन की ओर से की जाती है।पूजन सामग्री की जिम्मेदारी संभालने वाले पटवारी भगवान सिंह यादव के मुताबिक, अनुष्ठान के लिए करीब 45 तरह की सामग्री जुटाई जाती है। इसकी तैयारी दो दिन पहले शुरू हो जाती है। चौबीस खंबा माता मंदिर के पास एक दिन पहले काले चने और गेहूं उबालकर करीब 35 किलो बलबाकल तैयार किया जाता है। इसके साथ पूड़ी और भजिए भी बनाए जाते हैं।

इन मंदिरों में चढ़ाए जाते हैं सोलह शृंगार के सेट

नगर पूजा में कुछ प्रमुख देवी मंदिरों में सामान्य पूजन सामग्री के साथ सोलह शृंगार के सेट भी अर्पित किए जाते हैं। इनमें चौबीस खंबा माता मंदिर, चौंसठ योगिनी, नगरकोट महारानी, चामुंडा देवी, पद्मावती देवी, बहादुरगंज और गढ़कालिका मंदिर शामिल हैं।पूजा से जुड़ी कुछ परंपराएं स्थानीय लोक-विश्वासों में भी रची-बसी हैं। इनमें लाल कपड़े को लेकर प्रचलित मान्यता खास है। माना जाता है कि नगर पूजा से जुड़ा लाल कपड़ा बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए घर में बांधा जाता है।

हरसिद्धि माता मंदिर में भी होगा शासकीय पूजन

चौबीस खंबा मंदिर में सुबह के अनुष्ठान के बाद दोपहर करीब 12 बजे हरसिद्धि माता मंदिर में जिला प्रशासन की ओर से शासकीय पूजन किया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में माता हरसिद्धि की पूजा-अर्चना कर शृंगार सामग्री अर्पित की जाती है।महाअष्टमी पर उज्जैन के कई घरों में भी कुलदेवी की पूजा होती है। नगर पूजा में प्रशासनिक व्यवस्था, धार्मिक अनुष्ठान और पीढ़ियों से चली आ रही लोक-आस्था एक साथ दिखाई देती हैं। अब दिनभर चलने वाली यात्रा के अंतिम पड़ाव और रात के हांडी फोड़ अनुष्ठान पर नजर रहेगी।

 

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