आधुनिक मध्यप्रदेश 70 वर्ष का हो गया है। इन सात दशकों में प्रदेश ने सामाजिक और आर्थिक उन्नति की नई ऊंचाइयां छुई हैं। इसको यूं ही हृदय प्रदेश नहीं कहा जाता। यहां समाज के सभी वर्गों के लोग आपसी मेलजोल और सद्भाव के साथ रहते हैं। यह देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है, जहां क्षेत्रीय या अन्य आधारों पर भेदभाव की परंपरा नहीं रही। सामाजिक समरसता के साथ आर्थिक प्रगति की दिशा में भी प्रदेश ने अपनी अलग पहचान बनाई है। विकास की इस यात्रा की गवाही आर्थिक उन्नति से जुड़े आंकड़े दे रहे हैं। फिलहाल मध्यप्रदेश विकास के एक ऐसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ा है, जहां से उसकी भावी विकास यात्रा की दिशा और दशा तय होगी।
प्रति व्यक्ति आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
मध्यप्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार प्रचलित भाव पर प्रति व्यक्ति शुद्ध आय वर्ष 2011-12 में 38,497 रुपये थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में 1,69,050 रुपये हो गयी है। यानि करीब डेढ़ दशक में चार गुना वृद्धि दर्ज हुई है। यह वृद्धि राज्य में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार तथा विभिन्न क्षेत्रों में आय सृजन में हुई वृद्धि का सबसे प्रमाण है। स्थिर (2011-12) भाव पर, इसी अवधि के दौरान प्रति व्यक्ति शुद्ध आय 38,497 से बढ़कर 76,971 रुपये हो गयी है। प्रति व्यक्ति आय में रिकार्ड बढ़ोतरी के यह आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश ने अपने लोगों के लिए कल्याणकारी राज्य के रूप में काम किया है।
मजबूती से आगे बढ़ रही हमारी अर्थव्यवस्था
सकल घरेलू उत्पाद भी राज्य के आर्थिक विकास की मजबूती का संकेत है। वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में प्रचलित भाव पर मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 16,69,750 करोड़ अनुमानित है। जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 15,02,428 करोड़ रहा था। इस प्रकार विगत वर्ष की तुलना में सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है। सकल घरेलू उत्पाद में यह बढ़ोतरी केवल पिछले दो सालों की नहीं है। बढ़ोतरी का यह क्रम शुरू से है। उदाहरण के लिए प्रचलित भाव पर वित्तीय वर्ष 2011-2012 में सकल घरेलू उत्पाद 315562 था। अगले पांच साल में 2015-2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 54 हजार करोड़ पार कर गया। फिर अगले पांच साल में 2020-2021 में यह आंकड़ा 94, 6218 पहुंच गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का जीएसडीपी स्थिर (2011-12) भाव पर 7,81,911 करोड़ रुपये के आसपास है। जबकि 2011-12 में यह आंकड़ा केवल 31,5562 रुपये ही था।
बड़ी उपलब्धि, 35 साल में बजट का आकार 23 गुना बढ़ा
-मध्यप्रदेश सरकार के बजट का आकार वित्तीय वर्ष 2000-2001 में 16,393 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-2026 में 3,75,337 करोड़ रुपए हो गया है। बजट में यह वृद्धि वित्तीय वर्ष 2000-2001 की तुलना में लगभग 23 गुना है।
-प्रदेश की सरकारों ने महिला सशक्तिकरण के लिहाज से क्रांतिकारी योजनाएं चलायी हैं। जिसने प्रदेश की छवि को खास तौर पर उभारा है।
-जली उत्पादन में हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं।
-बाघ एवं अन्य प्रजाति के संरक्षण में हमारी प्रगति अकल्पनीय है। लिहाजा हमें टाइगर स्टेट का दर्जा दिया गया है।