भोपाल। मध्य प्रदेश में भले ही मानसून की विदाई को दो हफ्ते से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन अभी बारिश का दौर थमा नहीं है। शनिवार को बड़वानी जिले भारी बारिश ने किसानों के लिए मुसीबत लेकर आई। जिले के सेंधवा में बलवाड़ी की मंडी में रखी करीब 3,500 क्विंटल मक्का आधे घंटे की बारिश में भीग गई। इतना ही नहीं सीहोर और पीथमपुर में भी पानी गिरा। वहीं, मौसम केंद्र भोपाल ने 21 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है।
सेंधवा की मंडी में भीगी मक्का
दरअसल, सेंधवा के बलवाड़ी में सिर्फ आधे घंटे हुई बारिश का असर मंडी परिसर में दिखा। वहां खुले में रखी करीब 3,500 क्विंटल मक्का गीली हो गई। सीहोर जिले के कई गांवों और पीथमपुर के कुछ इलाकों में भी बौछारें पड़ीं।
21 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार अगले 24 घंटे में 21 जिलों में बारिश का अनुमान है। इस दौरान आंधी 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। विभाग का कहना है कि प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। इसी वजह से अगले तीन दिन ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, सागर, नर्मदापुरम, रीवा और जबलपुर संभाग के जिलों में मौसम बदला रहेगा। 18 और 19 अक्टूबर को नीमच, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सीधी, मऊगंज, सिंगरौली, सिवनी और बालाघाट में बारिश की संभावना है। 20 अक्टूबर से यह प्रणाली कमजोर पड़ने लगेगी और उसके बाद तेज बारिश के आसार नहीं हैं।
गुरुवार को श्योपुर, भिंड, मुरैना, नीमच और मंदसौर में पानी गिरा था। शुक्रवार को भी मौसम का मिजाज बदला रहा। दूसरी तरफ कई जिलों में न्यूनतम तापमान गिरा। अमरकंटक में 16.6 डिग्री, छिंदवाड़ा में 17.4 डिग्री, इंदौर में 17.6 डिग्री, कटनी के करौंदी में 18 डिग्री और बैतूल में 18.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
मानसून लौटा फिर भी क्यों हो रही बारिश
मध्य प्रदेश से मानसून 3 अक्टूबर को लौट गया था। मौसम प्रणाली सक्रिय होने से बारिश फिर शुरू हो गई है, और पिछले एक सप्ताह से पूर्वी जिलों में आंधी-बारिश का असर दिख रहा है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक का कहना है कि पिछले 10 साल के आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड, तीनों का असर रहता है। इस बार भी यही हो रहा है। महीने की शुरुआत में धूप निकली थी, अब रातें ठंडी हैं और कई जिलों में बारिश भी हो रही है। इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रदेश में करीब 100 दिन सक्रिय रहा।