भोपाल के बड़े तालाब की खूबसूरती और शहर का शांत माहौल अभिनेता नाना पाटेकर को खूब भाता था। फिल्म ‘राजनीति’ की शूटिंग के सिलसिले में भोपाल में बिताए दिनों को याद करते हुए रंगमंच कलाकार कमल जैन बताते हैं कि नाना यहां की फिजाओं में सहज महसूस करते थे। शाम होते ही वे बड़े तालाब के वोट क्लब पहुंच जाते और वहां घूमने आने वाले लोगों से भी बातचीत कर लेते थे।नाना पाटेकर के भोपाल से जुड़े इन किस्सों को कमल जैन ने साझा किया है। फिल्म में उनके साथ काम कर चुके कमल के मुताबिक, नाना का व्यवहार ऐसा था कि उनके आसपास रहने वाले लोगों को किसी बड़े सितारे के साथ होने का अहसास नहीं होता था।
शूटिंग के दौरान आम लोगों की तरह रहते थे नाना
निर्देशक प्रकाश झा की फिल्म ‘राजनीति’ की शूटिंग वर्ष 2009 में भोपाल में हुई थी। इसी दौरान कमल जैन को नाना पाटेकर के साथ अभिनय करने का मौका मिला। कमल के लिए यह अनुभव आज भी यादगार है।वे बताते हैं कि नाना सेट पर अपने सहज और जमीन से जुड़े अंदाज में रहते थे। स्थानीय लोगों और फिल्म यूनिट के सदस्यों के साथ उनका व्यवहार भी सामान्य रहता था। स्टारडम से दूर रहने की उनकी यही आदत लोगों को उनसे जोड़ती थी।बड़े तालाब के वोट क्लब पर शाम बिताना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। वहां आने वाले सैलानियों से बातचीत करने में उन्हें कोई झिझक नहीं होती थी। भोपाल का सुकून और तालाब के आसपास का माहौल उन्हें खास तौर पर पसंद था।
प्रेमपुरा घाट के बंगले से निहारते थे बड़ा तालाब
फिल्म की शूटिंग के दौरान प्रेमपुरा घाट के पास स्थित एक बंगले को नाना पाटेकर का ठिकाना बताया गया था। इस बंगले से बड़े तालाब का विस्तृत नजारा दिखाई देता था। बताया जाता है कि वे अक्सर इसकी बालकनी में बैठकर तालाब को निहारा करते थे।भोपाल में फिल्म की शूटिंग के दौरान उनका कई दिनों तक आना-जाना लगा रहा। शहर की हरियाली, शांत वातावरण और बड़े तालाब से उनका जुड़ाव उन दिनों की यादों का अहम हिस्सा बन गया।
विवेक सावरीकर ने बताया नाना के अभिनय का खास गुण
वरिष्ठ रंगकर्मी और कला समीक्षक विवेक सावरीकर के मुताबिक, नाना पाटेकर की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी के भीतर चल रहे संघर्ष और विद्रोह को पर्दे पर प्रभावी ढंग से उतारना थी। उनके अभिनय में एक खांटीपन था, जो किरदारों को वास्तविक बनाता था।सावरीकर ने उनके ग्रामीण जीवन और लोकजीवन से जुड़ाव का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, यह लगाव दिखावे तक सीमित नहीं था। नाना का मराठी लहजा भी उनके भावों की अभिव्यक्ति में बाधा नहीं बना। वे अपने संवाद और अभिनय के जरिए दर्शकों के मन तक पहुंचने में सफल रहते थे।भोपाल में ‘राजनीति’ की शूटिंग से जुड़ी ये यादें बताती हैं कि नाना पाटेकर के लिए यह शहर सिर्फ काम करने की जगह नहीं था। बड़े तालाब और यहां के शांत माहौल से जुड़ी उनकी यादें आज भी स्थानीय कलाकारों के अनुभवों में जिंदा हैं।