छत्तीसगढ़ में अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे पटवारियों पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। प्रदेशभर में हड़ताल पर गए कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। अब तक 50 से ज्यादा पटवारियों को सस्पेंड किया जा चुका है, जबकि करीब 5 हजार पटवारियों को शोकॉज नोटिस जारी किए गए हैं। इतना ही नहीं, हड़ताली पटवारियों के तबादले की कार्रवाई भी शुरू हो गई है.प्रशासन ने कर्मचारियों को तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए हैं। सरकार की इस सख्ती के बाद पटवारी संघ और प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं।
पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भी सस्पेंड
सरकार की कार्रवाई में पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप का नाम भी शामिल है। उन्हें भी निलंबित कर दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष पर हुई कार्रवाई को आंदोलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है.अलग-अलग जिलों में हड़ताल पर गए पटवारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है। प्रशासन ने साफ किया है कि काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
5 हजार पटवारियों को शोकॉज नोटिस
प्रदेशभर में करीब 5 हजार पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों के जरिए कर्मचारियों से हड़ताल पर रहने का जवाब मांगा गया है। वहीं, 50 से अधिक पटवारियों को निलंबित किया जा चुका है।इसके अलावा प्रशासन ने हड़ताली पटवारियों के तबादले की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हालांकि, कितने कर्मचारियों का ट्रांसफर हुआ है, इसकी जिलेवार विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
20 दिन से ठप पड़े राजस्व से जुड़े काम
छत्तीसगढ़ में पटवारी पिछले 20 दिनों से अधिक समय से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। पटवारियों के काम बंद करने से राजस्व विभाग की कई सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।इसका असर जमीन के नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े कामों पर पड़ रहा है। आम लोगों को अपने जरूरी कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।