बृजेश कबीर, हरदोई: सियासत में तस्वीरें अक्सर शब्दों से ज्यादा बोलती हैं। शिक्षक दिवस पर लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ भाजपा नेता राजा बक्स सिंह की आई तस्वीर ने सदर की राजनीति में ऐसा ही सवाल खड़ा कर दिया है, क्या 2027 की चुनावी बिसात पर राजा बक्स सिंह एक बार फिर नया दांव चलने की तैयारी में हैं?
राजा बक्स सिंह सदर सीट पर दो बार अलग-अलग दलों के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने 2012 में बसपा के टिकट पर 66,381 वोट हासिल किए थे। पांच साल बाद भाजपा के टिकट पर उनका वोट बढ़कर 92,626 पहुंच गया। मुकाबला इतना करीबी हुआ, सपा प्रत्याशी नितिन अग्रवाल महज 5,109 वोट से जीत सके। अब 2027 से पहले अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात ने पुराने चुनावी इतिहास को फिर चर्चा में ला दिया है।
चुनाव हर हाल में लड़ना, भाजपा टिकट दे तो अच्छा
राजा बक्स सिंह ने ‘स्वदेश’ से बातचीत में मुलाकात की पुष्टि की। बोले, लखनऊ खण्ड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से सपा प्रत्याशी कांति सिंह के निमंत्रण पर शिक्षक दिवस समारोह में पहुंचे थे। इसी दौरान अखिलेश यादव से भेंट हुई। साफ किया, फिलहाल वह भाजपा में हैं। भविष्य में सपा में जाने के के सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। इतना जरूर कहा, वह आसन्न विधानसभा चुनाव हर हाल में लड़ेंगे और भाजपा टिकट देती है तो इससे बेहतर कुछ नहीं होगा।
दो साल की खामोशी, फिर एक तस्वीर
करीब दो वर्ष से भाजपा संगठन में राजा बक्स सिंह की सक्रियता सीमित रही। कारण यह कि पार्टी कार्यक्रमों में उन्हें बुलाया ही नहीं जाता था। ऐसे में लखनऊ में उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात ने चर्चाओं को ईंधन दे दिया है। भेंट में लखनऊ पब्लिक स्कूल के संस्थापक और प्रतापगढ़ के सांसद एसपी सिंह पटेल की मौजूदगी भी चर्चा में रही।
सदर में सपा ने अखिलेश पाठक की सूरत में बिछा दिया है मैदान
भाजपा छोड़ सपा में पहुंचे अखिलेश पाठक सदर क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनका होर्डिंग और वॉल पेंटिंग अभियान तेज है। पाठक 2012 में शाहाबाद से विधानसभा से भाजपा से चुनाव लड़ चुके हैं। पार्टी ने 2017 में उन्हें टिकट नहीं दिया। भाजपा ने 2022 में पाठक का दावा फिर ठुकराया तो वे निर्दल मैदान में उतरे थे। ऐसे में सदर की सियासत में अब एक तरफ सपा की जमीन तैयार करते अखिलेश पाठक हैं और दूसरी तरफ अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद चर्चा के केंद्र में आए राजा बक्स सिंह।
‘राजा की अगली सवारी कौन-सी?’
अब सवाल यही है, राजा बक्स भाजपा में रहेंगे या 2027 से पहले फिर पाला बदल सपा की साइकिल पर सवार होंगे? फिलहाल वह भाजपा में हैं और उसका टिकट ही पहली पसंद बता रहे हैं। हालांकि, हरदोई सदर में इस तस्वीर ने 2027 के लिए एक सवाल जरूर लिख दिया है- ‘राजा की अगली सवारी कौन-सी?’
2017 में ‘अपनों’ के वोट ने रोक दी थी राजा की राह
धर्मवीर पन्ने ने काटा सजातीय वोट, 5,109 वोट से फिसल गई जीत
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के राजा बक्स सिंह ने 92,626 वोट पाए थे। सपा के नितिन अग्रवाल 97,735 वोट के साथ चुनाव जीत गए। दोनों के बीच अंतर महज 5,109 वोट रहा। लेकिन इस मुकाबले का एक महत्वपूर्ण पहलू था- बसपा ने धर्मवीर सिंह पन्ने को मैदान में उतारा था, जो राजा बक्स सिंह के सजातीय थे और उन्हें 30,628 वोट मिले थे। जिस चुनाव में राजा बक्स और नितिन अग्रवाल के बीच कांटे की टक्कर थी, बसपा प्रत्याशी को मिले 30 हजार से अधिक वोटों ने समीकरण सपा उम्मीदवार के पक्ष में कर दिये थे। उस चुनाव में सजातीय प्रत्याशी की मौजूदगी ने यह सवाल खड़ा किया, अगर ये वोट एक ही राजनीतिक धारा में जाते तो सदर का परिणाम बदल सकता था?