बृजेश कबीर, हरदोई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हाल ही में मुलाकात कर मदारी पासी के जन्मोत्सव के कार्यक्रम का निमंत्रण देने के बाद गोपामऊ के भाजपा विधायक श्याम प्रकाश ने अब ‘मदारी आर्मी’ के गठन का एलान किया है। साथ ही उन्होंने जो जयकारा दिया है, उसने इस पहल के सियासी मायने और गहरे कर दिए हैं। ‘जय मदारी-जय भीम-जय श्रीराम’ के तीन जयकारों में पासी, दलित और हिंदुत्व के व्यापक सामाजिक आधार को एक साथ साधने का संदेश देखा जा रहा है।
विधायक ने गुरुवार को सोशल मीडिया पोस्ट में बताया, मदारी पासी के जन्मोत्सव पर समाज के हितों की रक्षा, उत्थान और एकता के उद्देश्य से ‘मदारी आर्मी’ के गठन की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। संगठन की कमान टड़ियावां के ब्लॉक प्रमुख रवि प्रकाश को सौंपी जाएगी। विधायक ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर भड़ायल और टड़ियावां में प्रस्तावित कार्यक्रम का निमंत्रण दे चुके हैं, जिसमें जननायक मदारी पासी और विधायक के पिता झम्मन लाल की प्रतिमाओं का अनावरण होना है। मुख्यमंत्री को निमंत्रण के बाद संगठन की घोषणा और तीन नारों का सामने आना पूरे घटनाक्रम को सामाजिक आयोजन से आगे राजनीतिक संदेश बना रहा है।

तीन जयकारे, तीन सामाजिक संकेत
विधायक का ‘जय मदारी’ कहना सीधे पासी समाज की ऐतिहासिक-सामाजिक पहचान से जुड़ता है। ‘जय भीम’ दलित अस्मिता और विशेष रूप से जाटव समेत व्यापक दलित सामाजिक आधार का प्रमुख प्रतीक है। वहीं ‘जय श्रीराम’ भाजपा के मूल हिंदुत्व राजनीतिक विमर्श और उसके व्यापक समर्थक वर्ग का प्रतिनिधि नारा है। ऐसे में तीनों को एक साथ रखकर श्याम प्रकाश ने जिस सामाजिक विस्तार का संकेत दिया है, उसकी राजनीतिक व्याख्या स्वाभाविक है। इसे आसन्न विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षित सीट गोपामऊ के साथ अवध की राजनीति में पासी-दलित आधार और भाजपा के परंपरागत सामाजिक समर्थन के बीच एक साझा समीकरण बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, पासी समाज में मदारी पासी की पहचान ऐतिहासिक व्यक्तित्व संग सामाजिक अस्मिता और एका आंदोलन की विरासत से जुड़ी है। ऐसे में उनके नाम पर संगठन खड़ा करना स्व-समाज के बीच राजनीतिक-सामाजिक पहुंच बनाने का प्रयास माना जा सकता है।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने सराहा, सवाल भी उठे
विधायक की पोस्ट पर भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने ‘बहुत सुंदर’ टिप्पणी कर पहल की सराहना की। वहीं एक प्रतिक्रिया में ‘जय परशुराम’ मिस होने के प्रश्न पर विधायक ने उत्तर दिया ‘जय श्रीराम में सब आ गए’। कहा, हर जाति का अलग जयकारा जोड़ने पर सैकड़ों नारे हो जाएंगे। अकेले भीम सबको स्वीकार हो गए, उन्होंने तीन नारे दे दिए हैं। एक अन्य प्रतिक्रिया में ‘मदारी आर्मी’ की जगह ‘मदारी सेना’ के सुझाव पर विधायक ने भीम आर्मी का नाम लिये बिना कहा- ‘बदमिजाज आर्मी से आर्मी ही निपट सकती है।’ यह बातचीत भी बताती है, विधायक की घोषणा केवल संगठन के गठन के रूप में नहीं, जातीय-सामाजिक और वैचारिक संकेतों वाली राजनीतिक पहल के तौर पर लिया जा रहा है।

मदारी पासी : एका आंदोलन के नायक
जननायक मदारी पासी का नाम 1921-22 के एका आंदोलन से जुड़ा है। अवध के ग्रामीण इलाकों में किसानों के बीच चले इस आंदोलन में लगान, बेगार, जमींदारी शोषण और किसानों की एकजुटता जैसे सवाल प्रमुख थे। हरदोई और आसपास के क्षेत्रों में मदारी पासी इसके प्रमुख स्थानीय चेहरों में उभरे। किसान पंचायतों और सामूहिक प्रतिरोध के जरिए उन्होंने ग्रामीण समाज को संगठित करने में भूमिका निभाई। आज पासी समाज में मदारी पासी सामाजिक अस्मिता और प्रतिरोध के प्रतीक हैं। यही वजह है, उनके नाम पर होने वाला कोई बड़ा आयोजन केवल ऐतिहासिक स्मरण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके सामाजिक और राजनीतिक अर्थ भी निकाले जाते हैं।
श्याम प्रकाश के ‘तीन जयकारों’ वाले फॉर्मूले का लब्बोलुआब
जय मदारी → पासी समाज
जय भीम → दलित/जाटव सामाजिक आधार
जय श्रीराम → भाजपा का हिंदुत्व और व्यापक समर्थक वर्ग
संगठन → मदारी आर्मी
कमान → रवि प्रकाश, ब्लॉक प्रमुख टड़ियावां
पहला बड़ा मंच → मदारी पासी जन्मोत्सव
निष्कर्ष: मुख्यमंत्री से मुलाकात और निमंत्रण के बाद ‘मदारी आर्मी’ का एलान तथा तीन जयकारों का चयन यह संकेत दे रहा है, श्याम प्रकाश गोपामऊ की सुरक्षित सीट से आगे पासी-दलित और भाजपा के परंपरागत सामाजिक आधार को एक राजनीतिक छतरी के नीचे जोड़ने की कोशिश में हैं।