रायपुर। छत्तीसगढ़ के रावघाट तक आजादी के 78 सालों बाद आखिरकार ट्रेन पहुंच गई है। दक्षिण छत्तीसगढ़ का यह दूरस्थ इलाका दशकों तक रेल नक्शे से बाहर रहा। मंगलवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की मौजूदगी में ताड़ोकी रावघाट और अभनपुर कुरूद ब्रॉडगेज लाइन का उद्घाटन हुआ। रेल मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कार्यक्रम से जुड़े। साथ ही रावघाट रायपुर और रायपुर कुरूद के बीच दो नई यात्री ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई गई।
दशकों बाद रेल नक्शों पर आया रावघाट
आजादी के बाद रावघाट तक रेल का पहुंचना इस पूरे इलाके के लिए बड़ी घटना है। अब तक यहां के लोगों को रायपुर जैसे बड़े शहर तक जाने के लिए सड़क के भरोसे रहना पड़ता था। नई लाइन से पढ़ाई, इलाज, रोजगार और कारोबार से जुड़े मौके लोगों के ज्यादा करीब आएंगे। रेलवे ने इसे दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
95 किमी की नई लाइन में करोड़ों का खर्च
दल्लीराझरा से रावघाट के बीच 95 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बनकर तैयार हो गई है। इस पर कुल 1628 करोड़ रुपये खर्च हुए। ताड़ोकी से रावघाट के बीच 17.5 किलोमीटर का आखिरी हिस्सा पूरा होते ही पूरी परियोजना का काम खत्म हुआ। रायपुर से रावघाट तक का किराया सिर्फ 55 रुपये रखा गया है। इसका फायदा विद्यार्थियों, दैनिक यात्रियों और आम लोगों को मिलेगा। किसान अपनी उपज भी बड़े बाजारों तक भेज सकेंगे।
लौह अयस्क ढुलाई को मिलेगी रफ्तार
रावाघाट इलाका लौह अयस्क के लिए जाना जाता है। रेल संपर्क जुड़ने से यहां से अयस्क की ढुलाई तेज होगी। इसका सीधा फायदा भिलाई इस्पात संयंत्र और देश के लोह व इस्पात उद्योग को मिलेगा।
अभनपुर कुरूद लाइन और नई सुविधा
अभनपुर से कुरूद के बीच 22 किलोमीटर रेल लाइन का गेज बदलने का काम पूरा हो गया है। कुरूद से धमतरी के बीच का बचा हुआ काम जारी है। कार्यक्रम में रायपुर में इलेक्ट्रिक रेल इंजन मेंटेनेंस फैसिलिटी का शिलान्यास भी हुआ। तैयार होने पर यहां 300 हाई हॉर्सपावर इलेक्ट्रिक इंजनों का रखरखाव हो सकेगा।