Gonda Tiranga Yatra : आजादी का जश्न मनाने के लिए शहर तिरंगे से सज गया, लेकिन गोण्डा की सड़कों ने कुछ अलग ही अंदाज में स्वतंत्रता दिवस मनाया। सड़कों पर कूड़े के ढेर, जगह-जगह मिट्टी और जलभराव देखकर लगा मानो नगर की सफाई व्यवस्था ने भी ‘आजादी’ हासिल कर ली हो—काम करने की जिम्मेदारी से आजादी।
चार चांद लगाते नजर आए कूड़े के ढेर
स्टेशन रोड पर ऐतिहासिक राजा देवी बख्श सिंह जलाशय के आसपास लगे कूड़े के ढेर शहर की खूबसूरती को चार चांद लगाते नजर आए। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर जहां शहर को चमकना चाहिए था, वहां गंदगी ने अपना कब्जा जमा रखा था। राहगीरों को शायद यह संदेश दिया जा रहा था कि राष्ट्रीय पर्व केवल झंडा फहराने तक सीमित है, सफाई तक पहुंचना अभी बाकी है।
हाथों में तिरंगा और नीचे गंदगी
मेडिकल कॉलेज के सामने पहले से मौजूद जलभराव ने भी अपनी परंपरा कायम रखी। ऊपर से मिट्टी के ढेर ने रास्ते को और आकर्षक बना दिया। कचहरी रोड की कहानी भी कुछ अलग नहीं रही। संयोग देखिए कि इसी रास्ते से तिरंगा यात्रा भी गुजरी। हाथों में तिरंगा और नीचे सड़क पर गंदगी—देशभक्ति का यह अनोखा संगम शहर ने खूब देखा।
क्या कहते है लोग?
शहर की आम सड़कों पर सफाई के इंतजार में कूड़ा पड़ा रहा, जबकि आफीसर्स कॉलोनियों के आसपास थोड़ी-बहुत सफाई जरूर दिखाई दी। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सफाई भी वीआईपी और आम आदमी देखकर रास्ता चुनती है? लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्व की पूर्व संध्या पर कम से कम प्रमुख मार्गों की सफाई तो होनी ही चाहिए थी। लेकिन गोण्डा शायद इस मामले में भी ‘आत्मनिर्भर’ बनने की राह पर है, कूड़ा खुद फैलता है और सफाई का इंतजार भी खुद करता है।
नपा ईओ का कहना?
नगर पालिका के ईओ संतलाल रावत का कहना है कि संबंधित सफाई नायकों से इस बाबत पूछताछ की जाएगी। अब उम्मीद यही है कि पूछताछ के बाद सफाई भी कहीं दिखाई दे। वरना अगली बार शहर को ‘स्वच्छ गोण्डा’ का सपना दिखाने से पहले ‘गंदे गोण्डा’ की सड़कों पर नजर डालना जरूरी होगा।