उज्जैन। मंदिर का भवन हट गया, दीवारें भी हटा दी गईं... लेकिन अब उज्जैन के खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर एक बिल्कुल अलग सवाल सामने आ गया है आखिर यह प्रतिमा कितनी पुरानी है? शुरुआती स्तर पर इसके करीब 1000 साल पुराना होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना गया है। वैज्ञानिक जांच के बाद अब इतिहासकार और विशेषज्ञ प्रतिमा की उम्र, शिल्प शैली और इसके पीछे के इतिहास को समझने की कोशिश करेंगे।

दरअसल, सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी सड़क की जद में खड़े हनुमान मंदिर का भवन और चाहरदीवारी आई थी। निर्माण का हिस्सा हटाए जाने के बाद प्रतिमा को लेकर मामला संवेदनशील हो गया। फिलहाल प्रतिमा को टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है और यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।अब सबसे ज्यादा चर्चा प्रतिमा की प्राचीनता को लेकर है। पुरातत्व विभाग की ओर से इसके करीब 1000 साल पुराना होने की संभावना पर जांच की बात सामने आई है। लेकिन किसी मूर्ति की वास्तविक उम्र सिर्फ अनुमान से तय नहीं की जा सकती। इसके लिए उसकी बनावट, पत्थर, मूर्तिकला की शैली और ऐतिहासिक संदर्भों का विशेषज्ञ अध्ययन जरूरी होगा।
इतिहासकार यह भी देखेंगे कि प्रतिमा की मुद्रा, चेहरे की बनावट, शरीर की संरचना, आभूषण और शिल्प शैली किस ऐतिहासिक काल की मूर्तियों से मिलती है। इसके साथ ही पुराने दस्तावेजों, स्थानीय इतिहास और धार्मिक परंपराओं में इस प्रतिमा या स्थान का कोई उल्लेख मिलता है या नहीं, इसकी भी पड़ताल हो सकती है।
170 साल पुराने मंदिर में 1000 साल पुरानी प्रतिमा?
यही सवाल इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना रहा है। स्थानीय स्तर पर खड़े हनुमान मंदिर को करीब 170 साल पुराना बताया जाता है। ऐसे में अगर विशेषज्ञ जांच में प्रतिमा की उम्र वास्तव में 1000 साल के आसपास सामने आती है, तो सवाल उठेगा कि मंदिर बनने से पहले यह प्रतिमा कहां थी?क्या यहां पहले कोई पुराना धार्मिक स्थल मौजूद था? क्या प्रतिमा किसी दूसरे प्राचीन मंदिर या स्थान से यहां लाई गई थी? या फिर इस जगह पर सदियों से पूजा की कोई परंपरा चली आ रही थी? इन सवालों के जवाब इतिहासकारों की जांच के बाद ही मिल पाएंगे।
प्रतिमा नहीं हटी तो बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़
इस बीच खड़े हनुमान जी को लेकर श्रद्धालुओं की आस्था भी लगातार देखने को मिल रही है। गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत आसपास के राज्यों से लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। कई श्रद्धालु प्रतिमा के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं, जिसके चलते इससे जुड़े वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं।मंगलवार शाम मंदिर परिसर में महाआरती हुई। ढोल-ताशों के बीच हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। बुधवार को संत समाज के लोगों ने भी पहुंचकर पूजा-अर्चना की और प्रतिमा को यथास्थान रखने की अपील की।
‘चमत्कार’ की चर्चा, प्रशासन ने दी सफाई
पिछले दिनों सोशल मीडिया पर यह दावा भी सामने आया कि प्रतिमा को हटाने की कोशिश की गई, लेकिन वह अपनी जगह से नहीं हिली। इसे कुछ लोगों ने हनुमान जी की दैवीय शक्ति से जोड़कर देखा। हालांकि प्रशासन ने इन दावों को लेकर सफाई दी है। प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर चल रही कई बातें भ्रामक हैं और प्रतिमा को विस्थापित करने के लिए मशीन से कोई प्रयास नहीं किया गया।संत समाज के कुछ लोगों ने प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने का विरोध किया है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने भी कथित तौर पर प्रतिमा हटाने की योजना के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रशासन की ओर से लगातार कहा गया है कि प्रतिमा को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा आखिर कितनी पुरानी है? करीब 1000 साल पुराना होने का शुरुआती अनुमान अगर विशेषज्ञ जांच में सही साबित होता है, तो यह प्रतिमा उज्जैन की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। लेकिन इसके लिए अब इतिहासकारों और विशेषज्ञों की जांच का इंतजार करना होगा।