लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। योगी सरकार ने सरकारी भर्तियों में चरित्र और पूर्ववृत्त सत्यापन को लेकर नई नीति लागू की है। इसके तहत अब सामान्य पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को पुलिस सत्यापन पूरा होने से पहले प्रोविजनल नियुक्ति दी जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करना है।
सत्यापन से पहले मिलेगी प्रोविजनल जॉइनिंग
नई नीति के तहत सामान्य पदों पर चयनित उम्मीदवारों को चरित्र सत्यापन पूरा होने का इंतजार किए बिना अस्थायी रूप से नियुक्ति दी जा सकेगी। यह व्यवस्था सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों, स्वायत्त निकायों, पंचायतों और स्थानीय निकायों की सीधी भर्ती पर लागू होगी।हालांकि, संवेदनशील पदों पर नियुक्ति से पहले विस्तृत जांच अनिवार्य रहेगी।
30 दिन में पूरी करनी होगी पुलिस जांच
नीति के अनुसार, जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई को सत्यापन रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर सौंपनी होगी। अभ्यर्थियों के गृह जिले और उन जिलों में भी सत्यापन किया जाएगा, जहां वे पिछले पांच वर्षों के दौरान एक साल से अधिक समय तक रहे हैं।पुलिस सत्यापन उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर किया जा सकेगा। इसके लिए अभ्यर्थी की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी।
गंभीर अपराधों में शामिल अभ्यर्थियों को नहीं मिलेगी नौकरी
नई नीति में गंभीर अपराधों में संलिप्त अभ्यर्थियों को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। हत्या, बलात्कार, पेपर लीक, नकल गिरोह और साइबर ठगी जैसे गंभीर मामलों में शामिल उम्मीदवार सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य हो सकते हैं।हालांकि, केवल FIR दर्ज होना ही अपने आप में अयोग्यता का आधार नहीं होगा। मामले की प्रकृति और लागू नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
गलत जानकारी देने पर रद्द हो सकती है नियुक्ति
सरकार ने अभ्यर्थियों को अपने आपराधिक मामलों और पूर्ववृत्त से जुड़ी जानकारी सही तरीके से देने की हिदायत दी है। जानकारी छिपाने या गलत विवरण देने पर नियुक्ति रद्द की जा सकती है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
युवाओं को क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था से पुलिस सत्यापन के कारण नियुक्ति में होने वाली देरी कम होने की उम्मीद है। चयनित अभ्यर्थी प्रोविजनल नियुक्ति के जरिए जल्द नौकरी शुरू कर सकेंगे, जबकि सत्यापन की प्रक्रिया समानांतर रूप से जारी रहेगी।